नई दिल्ली. मुर्गी पालन पोल्ट्री के अंतर्गत आने वाला व्यवसाय है. मुर्गी पालन के जरिए इंसानों के खाने के लिए मांस या अंडे का उत्पादन किया जाता है. मुर्गियों बड़ी संख्या में पाली जाती हैं. यही वजह है कि हर साल 60 अरब से अधिक मुर्गियां खाने के लिए मारी जाती हैं. फिर भी मुर्गियों की कमी देश में नहीं होती है. एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर आप 1000 चिक्स के साथ शुरुआत करते हैं तो आपको लगभग 1200 वर्ग फुट के क्षेत्र की जरूरत होती है इसकी लागत लगभग 1,50,000 से लेकर 1,80,000 रुपये तक हो सकती है.
एक्सपर्ट ये भी कहते हैं कि भारत के पोल्ट्री बाजार में हाल के वर्षों में तेजी के साथ वृद्धि हुई है, जिसका आकार 2023 में 30.46 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है. कहा जा रहा है कि देश में हर साल 8 से 10 फीसदी की ग्रोथ रेट से पोल्ट्री कारोबार में उछाल आ रही है. इस इजाफे को विभिन्न कारण हैं. जैसे प्रोटीन की बढ़ती खपत, बढ़ती खर्च योग्य आय और उपभोक्ताओं के बीच पोल्ट्री उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता.
कितना होता है वजन
अब सवाल उठता है कि मुर्गीपालन शुरू करें तो बेहतर नस्ल कौन सी होगी. जिससे ज्यादा कमाई की जा सकती है. ऐसे तो बहुत सही नस्लें हैं. हालांकि हम यहां फ्रीज़ल नस्ल का जिक्र कर रहे हैं. ये नस्ल पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान निकोबार द्वीप समूहों में पाई जाती है. दरअसल, इसके बारे में कहा जाता है कि ये ज्यादा गर्मी वाले क्षेत्रों के मौसम को बर्दाश्त कर लेती है. इसलिए गर्म क्षेत्र में इसे ज्यादा पाला जाता है. अब अगर इस नस्ल का वार्षिक अंडा उत्पादन की बात की जाए तो 70 से 80 अंडे ये दे देती है. वहीं औसत अंडे का वज़न 45-50 ग्राम होता है. मुर्गे और मुर्गी का परिपक्व औसत शरीर भार क्रमशः 2 से 2.5 किग्रा व 1.2 से 1.5 किया होता है. इनके पंख घुंघराले होते हैं.
हर चक्र में देती है 54 अंडे
यह कुक्कुट नस्ल मुख्यतः आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में पाई जाती है. यह पक्षी एक कंधी व छोटे आकार के होते हैं. गर्दन मोटी और ढीली होती है, और टांग पर पंख होते हैं. कुछ पक्षियों के मूंछें होती हैं. मुर्गे के गले व पंर्यो का रंग सुनहरा पीला व काफी आकर्षक होता है और पूंछ पर नीले काले रंग के सीकल पंख होते हैं. मुर्गी आमतौर पर काले या सफेद पंख के साथ मिश्रित भूरे रंग की होती है. इस नस्ल में वेटल नहीं होता. ये पक्षी मजबूत होते हैं और अधिकतर खानाबदोश जनजातियों द्वारा ही पाले जाते हैं व सामान्य कुक्कुट रोगों के प्रति काफी प्रतिरोधी होते हैं. मुर्गे और मुर्गी का औसत शरीर भार क्रमशः 2.16 और 1.43 कि ग्रया होता है. मुर्गियां लगभग 25 हफ्तों की आयु में परिपक्व होती हैं और 40.3 ग्राम अंडे वजन और 81.3% हैचेबिलिटी के साथ प्रति चक्र 54 अंडों का उत्पादन करती हैं.