नई दिल्ली. भारत भले ही दुनिया में नंबर वन दूध उत्पादक देश है लेकिन अभी भी इस सेक्टर में कई चुनौतियां हैं. जिनको दूर करना बेहद ही जरूरी है. इसी दिशा में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड कई काम कर रहा है. जिसमें एनडीडीबी की ओर से किए जा रहे कामों में वैज्ञानिक प्रजनन (scientific breeding) भी है. जिससे डेयरी सेक्टर चुनौतियों से पार पाया जा सकता है. असल में NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने पांडिचेरी यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स रिसर्च एसोसिएशन’ (AERA) के 34वें वार्षिक सम्मेलन में ये बाते कही. वहीं डॉ. शाह ने भारतीय संस्कृति में पशुओं के महत्व और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्थायी आजीविका प्रदान करने में डेयरी उद्योग की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला.
उन्होंने भारत में डेयरी क्षेत्र की शानदार प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया है, और दूध देश का सबसे बड़ा कृषि उत्पाद है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का छोटे स्तर का और कम लागत वाला डेयरी मॉडल किस तरह साल भर आय का जरिया बनता है, समान विकास को बढ़ावा देता है, और ग्रामीण समृद्धि तथा सामाजिक बदलाव का एक सशक्त माध्यम है.
डॉ. शाह ने क्या-क्या कहा
डेयरी सेक्टर के विकास के बारे में कहा कि उद्देश्य किसानों को बाजार तक पहुंच दिलाना, पशुओं की उत्पादकता बढ़ाना और इस तरह किसानों की आय में वृद्धि करना जरूरी था.
डेयरी सहकारी समितियों की ताकत पर जोर देते हुए बताया कि इनके जरिए उपभोक्ता द्वारा खर्च किए गए हर रुपये का लगभग 80 फीसद हिस्सा सीधे दुग्ध उत्पादकों तक पहुंचता है.
डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की केवल ‘भागीदारी’ से आगे बढ़कर, महिलाओं के ‘नेतृत्व’ वाली डेयरी व्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए NDDB के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला.
डॉ. शाह ने डेयरी क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों और आगे की राह पर चर्चा करते हुए, डॉ. शाह ने कई बातों पर जोर दिया, कहा कि पशुओं की उत्पादकता बढ़ाना जरूरी है.
साथ ही दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संगठित डेयरी क्षेत्र का विस्तार करना, उत्पादों में मूल्यवर्धन (value addition) को बढ़ावा देना होगा.
निर्यात के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा मजबूत करना होगा और पर्यावरणीय स्थिरता पर ध्यान देना. विशेष रूप से इस क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना जरूरी है.
इन चुनौतियों से निपटने के लिए, उन्होंने वैज्ञानिक प्रजनन (scientific breeding) के क्षेत्र में NDDB की चल रही पहलों का जिक्र किया.
इनमें स्वदेशी ‘सेक्स-सॉर्टेड सीमेन’ तकनीक, जीनोमिक चिप्स और OPU-IVF का विकास शामिल है.
इसके साथ ही, उन्होंने पशु पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी पहलों का भी उल्लेख किया, जैसे कि ‘रेशन बैलेंसिंग प्रोग्राम’.
साथ ही ‘टोटल मिक्स्ड रेशन’ (TMR), ‘एथनो-वेटरनरी मेडिसिन’ (पारंपरिक पशु चिकित्सा) और ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण.
उन्होंने राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के अंतर्गत एकीकृत पशुधन प्रबंधन के लिए भारत पशुधन सहित डिजिटल नवाचारों पर भी प्रकाश डाला.












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