नई दिल्ली. गोवंश की देखभाल को लेकर जहां उत्तर प्रदेश की सरकार गंभीर है तो वहीं उसके नक्शे कदम पर चलते हुए तमाम जिलों के जिम्मेदार अधिकारी भी गंभीर नजर आते हैं. इसी की एक तस्वीर यूपी के एटा जिले से सामने आई है. जहां गोवंश की देखभाल के लिए अलग तरह की व्यवस्था जिला प्रशासन ने करने का फैसला किया है. असल में जिले की सरकारी गौशालाओं में नंदी और गायों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था शुरू की जा रही है. इसके तहत जिले की 14 सरकारी गौशालाओं में मादा गोवंश के लिए अलग इंतजाम किए जा रहे हैं.
जिला प्रशासन की ओर से कहा गया है कि इससे उनके भोजन, पानी और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा. नंदी को अलग रखने का उद्देश्य गोवंश को उनके हमले से सुरक्षित रखना है.
अभी तक एक साथ रखने की है व्यवस्था
गौरतलब है कि अभी तक एटा की जिले भर की गौशालाओं में बड़ी संख्या में गोवंश को एक साथ रखा जाता है.
ऐसे में नंदी और गायों को एक ही स्थान पर रखने से मादा गोवंश के घायल होने का खतरा बना रहता है.
इसके मद्देनजर गौशालाओं में दोनों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था की जा रही है. ताकि सहूलत मिल सके.
बताया गया कि नंदी और गायों को अलग रखने की व्यवस्था से गौशाला प्रबंधन को भी सहूलियत मिलेगी.
इससे गोवंश के बीच होने वाले संघर्ष की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है. पशु जख्मी नहीं होंगे.
जानकारी दी गई है कि जिले की सभी 16 सरकारी गौशालाओं में इस व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है.
एक ओर जहां गो आश्रय स्थलों में कमजोर गोवंश को अलग-अलग रखा जाएगा तो वहीं जिले के पांच चिह्नित गो आश्रय स्थलों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा.
पिछले दिनों एटा के कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम एम. अरुणमोली की मौजूदगी में आयोजित बैठक में यह निर्देश दिए गए.
इस दौरान जिलाधिकारी एम. अरुणमोली ने कहा कि गोवंश के संरक्षण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी.
सभी गो आश्रय स्थलों में चारा-पानी, खानपान, साफ-सफाई और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था की जाए.
सड़कों और बाजारों में घूम रहे निराश्रित गोवंश को नजदीकी गो आश्रय स्थलों में संरक्षित किया जाए.
चारागाह की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर गो आश्रय स्थलों से संबद्ध करने के निर्देश दिए.
उन्होंने पक्की बाउंड्रीवाल बनवाने, सभी गोवंश की ईयर टैगिंग कराने और सीसीटीवी कैमरों के संचालन के लिए एक वर्ष का रिचार्ज कराने को कहा.
निष्कर्ष
निराश्रित गोवंश के लिए इन्वर्टर सहित पावर बैकअप की व्यवस्था होनी चाहिए. सभी गो आश्रय स्थलों में वर्मी कंपोस्ट पिट निर्माण और नियमित साफ-सफाई कराई होगी.












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