नई दिल्ली. गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना पशुओं के लिए सालभर चारा उपलब्ध हो, इसके लिए लगातार काम का रहा है. संस्था के विस्तार शिक्षा निदेशालय (Directorate of Extension Education) ने इसको लेकर चारा उत्पादन, स्थिति, चुनौतियां और आगे की राह विषय पर एक विचार-मंथन सत्र आयोजित किया. इसमें पंजाब में चारा उत्पादन की वर्तमान स्थिति, सामने आ रही चुनौतियों और टिकाऊ पशुपालन के लिए रणनीतियों पर चर्चा की गई. इस दौरान संस्थान के कुलपति डॉ. जेपीएस गिल ने एक अहम ऐलान किया. जिससे आने वाले समय में पशुओं के लिए पोषण से भरपूर चारा उपलब्ध होता रहेगा.
उन्होंने कहा कि टिकाऊ डेयरी पालन को बढ़ावा देने और पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे, खेती की बेहतर तकनीकों और संस्थागत सहयोग के महत्व पर जोर दिया जा रहा है. उन्होंने यह भी घोषणा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ‘चारा उत्पादन में उत्कृष्टता केंद्र’ (Centre of Excellence in Fodder Production) स्थापित करने की योजना बना रहा है.
साइलेज बनाने की जरूरत पर दिया जोर
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने साल भर गुणवत्तापूर्ण चारे की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चारे की खेती में मशीनीकरण, साइलेज (silage) बनाने और जलवायु के अनुकूल किस्मों के महत्व पर जोर दिया.
पीएयू (PAU) के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. माखन सिंह भुल्लर ने चारे की वैज्ञानिक खेती और किसानों पर केंद्रित विस्तार पहलों की आवश्यकता पर बल दिया.
साथ ही चारा उत्पादन और पशुपालन में आ रही चुनौतियों से निपटने के लिए छात्रों और युवा पेशेवरों को शामिल करने के महत्व को रेखांकित किया.
वहीं एक्सपर्ट ने शोध को बाजार में उतारने योग्य तकनीकों में बदलने के लिए नवाचार, उद्यमिता और व्यावहारिक व्यावसायिक मॉडलों की भूमिका पर प्रकाश डाला.
लुधियाना स्थित ATARI (जोन-I) के डॉ. आर. के. राणा ने चारे की बेहतर उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा देने में कृषि अनुसंधान और विस्तार नेटवर्क की भूमिका पर जोर दिया.
साथ ही चारे की उत्पादकता और पोषण मूल्य बढ़ाने के लिए चारे की बेहतर किस्मों और गुणवत्तापूर्ण बीजों के महत्व पर चर्चा की.
इसके अलावा राज्य में चारे की नई किस्में विकसित करने के कार्यक्रमों के बारे में बताया। श्री विपिन शर्मा ने चारा उत्पादन में मशीनीकरण पर चर्चा हुई. जिसमें बुआई, कटाई, प्रसंस्करण और साइलेज बनाना शामिल है.
वहीं पशु पोषण विभाग की ओर से आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में डॉ. जेपीएस गिल ने संतुलित पोषण, पशु उत्पादकता बढ़ाने, पशु आहार के बेहतर उपयोग और डेयरी किसानों का मुनाफा बढ़ाने में ‘पशु आहार परीक्षण तकनीकों’ के महत्व पर जोर दिया.












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