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Animal: एमपी सरकार ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड के उपयोग पर लगाया बैन, मवेशियों के लिए भी है खतरनाक

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश सरकार ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड नाम के कीटनाशक के उपयोग पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है. असल में ये कीटनाशक न सिर्फ इंसानों बल्कि पशुओं के लिए बेहद हानिकारक है. भारत सरकार ने इस संबंध में पहले ही अधिसूचना जारी कर दी है. इस बात की जानकारी देते हुए किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग की ओर से बताया गया कि इस खतरनाक कीटनाशक का निर्माण करने वाली कंपनियों द्वारा विक्रय और भण्डारण पर तत्काल रोक लगाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. जिन निर्माताओं के पास पैराक्वेट डायक्लोराइड के पंजीकरण प्रमाण पत्र है उन्हें तत्काल केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड और पंजीकरण समिति को वापस करने के निर्देश दिए हैं.

साथ ही इस कीटनाशक के बचे स्टाक को वापस बुलाकर नियम, प्रक्रिया अनुसार नष्ट करने की कार्रवाई करने के लिए भी निर्देश दिए हैं. गौरतलब है कि भारत सरकार ने कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत पैराक्वेट डाइक्लोराइड के नए रजिस्ट्रेशन और पहले से जारी सभी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स को रद्द कर इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. दुनिया के लगभग 70 देशों में इसका उपयोग पहले से प्रतिबंधित है.

बेहद ही खतरनाक है कीटनाशक
असल में ये कीटनाशक पौधों के हरे हिस्सों के संपर्क में आते ही उन्हें तेजी से जलाकर नष्ट कर देता है. इसे ‘ग्रामोक्सोन’ (Gramoxone) जैसे ट्रेड नाम से भी जाना जाता है.

यह जानवरों के लिए बहुत जहरीला है. इसके शरीर में जाने या संपर्क में आने से फेफड़े और गुर्दे (किडनी) गंभीर रूप से खराब हो जाते हैं.

इसका कोई विशिष्ट एंटीडोट (विषारोधी इलाज) उपलब्ध नहीं है. इसलिए ये और ज्यादा खतरनाक हो जाता है.

इस कीटनाशक की वजह से जानवरों के मुंह जुबान भोजन नली और पेट में गंभीर जलन छाले और अल्सर पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है.

एनिमल एक्सपर्ट कहते हैं कि इससे लगातार उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द की शिकायत भी जानवरों को हो सकती है.

कीटनाशक के संपर्क में आने से जानवरों की फेफड़ों की कोशिकाएं नष्ट हो सकती हैं. उन्हें सांस लेने में भारी तकलीफ होती है.

इतना ही नहीं अगर इस रसायन के अंश जानवरों की त्वचा और आंख के संपर्क में आ जाए तो स्किन जलने लगती है और आंखों में धुंधलापन भी आ सकता है

निष्कर्ष
बहुत से डेयरी फार्मर जो चारा भी बोते हैं. वह भी इसका इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अब इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है और इसको लेकर जागरूकता फैलाई जा रही है. ताकि इससे नुकसान ना हो.

Written by
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