नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के एक्सटेंशन एजुकेशन निदेशालय ने बठिंडा स्थित अंबुजा फाउंडेशन के सहयोग से 56 डेयरी महिला उद्यमियों के लिए “साफ-सुथरे दूध के उत्पादन और दूध से बनने वाले उत्पादों के मूल्यवर्धन” पर एक दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया. इस प्रोग्राम का मकसद डेयरी फार्मिंग से जुड़ी महिलाओं की तकनीकी जानकारी, उद्यमिता कौशल और आय बढ़ाने की क्षमता को मजबूत करना था. ट्रेनिंग में वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, साफ़-सुथरे तरीके से दूध का उत्पादन, दूध की प्रोसेसिंग, मूल्यवर्धन और छोटे स्तर पर मुनाफ़े वाले डेयरी उद्यमों के विकास पर ध्यान दिया गया.
वाइस-चांसलर डॉ. जे.पी.एस. गिल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि महिला डेयरी उद्यमियों को वैज्ञानिक जानकारी, व्यावहारिक कौशल और उद्यमिता क्षमताओं से सशक्त बनाने से डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, घरेलू आय में बढ़ोतरी और ग्रामीण इलाकों में टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने यूनिवर्सिटी और अंबुजा फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों की सराहना की.
डेयरी किसानों ने क्या-क्या सीखा
एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने जानवरों के स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की जरूरत है.
साथ ही दूध निकालते समय साफ-सफाई बनाए रखने और दूध से बनने वाले उत्पादों के मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने के महत्व पर भी उन्होंने बात रखी.
उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यावहारिक ट्रेनिंग प्रोग्राम महिला उद्यमियों को छोटे स्तर पर डेयरी प्रोसेसिंग उद्यम विकसित करने के लिए व्यावहारिक जानकारी प्रदान करते हैं.
तकनीकी सत्रों में जानवरों के स्वास्थ्य के बचाव का प्रबंधन, साफ-सुथरे दूध का उत्पादन के बारे में सिखाया भी गयाा.
साथ ही मिनी डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करना दूध की प्रोसेसिंग और मूल्यवर्धन, प्रीमियम डेयरी उत्पाद और मुनाफ़े वाले बिजनेस मॉडल जैसे विषयों को शामिल किया गया.
विशेषज्ञों ने बीमारी से बचाव, साफ-सुथरे तरीके से दूध को संभालने, डेयरी प्रोसेसिंग, उत्पादों में विविधता लाने, मार्केटिंग और उद्यम विकास पर व्यावहारिक और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया.
प्रतिभागियों ने यूनिवर्सिटी के मिल्क प्लांट और प्रोसेसिंग चेन का दौरा भी किया और वैज्ञानिक तरीके से दूध की प्रोसेसिंग और मूल्य-वर्धित डेयरी उत्पादों के बारे में व्यावहारिक जानकारी हासिल की.
इस ट्रेनिंग को बठिंडा स्थित अंबुजा फाउंडेशन ने प्रायोजित किया था और इसका समन्वय बठिंडा स्थित अंबुजा फाउंडेशन की प्रोजेक्ट ऑफिसर वीरपाल कौर ने किया.
डॉ. रवदीप सिंह और डॉ. कृतिका वर्मा ने स्टूडेंट कोऑर्डिनेटर हरयुवराज सिंह बेदी और नवरोज कौर की मदद से इस कार्यक्रम का संचालन किया.













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