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Dairy News: बिहार के पूर्वी चंपारण में गायों की नस्ल सुधार पर होगा काम, बढ़ेगी डेयरी किसानों की इनकम

लोगों को संबोधित करते एनडीडीबी चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह.

नई दिल्ली. बिहार के मोतिहारी में आयोजित कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य उद्यमी उन्नति मेला में पशुपालन और मत्स्यपालन को बढ़ावा देकर क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने की बात कही गई. इस मौके पर सांसद राधा मोहन सिंह एनडीडीबी के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह और बिहार सरकार के सचिव शीर्षत कपिल अशोक मौजूद रहे. सांसद ने पूर्वी चंपारण के लिए इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि कृषि के साथ पशुपालन एवं मत्स्यपालन को बढ़ावा देकर क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है.

उन्होंने पशुओं की नस्ल सुधार के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए बताया कि यदि कोई गाय 5 लीटर दूध देती है, तो नस्ल सुधार के माध्यम से उसकी उत्पादकता को 8–10 लीटर तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा. इस दिशा में चंपारण के 300 गांवों में नस्ल सुधार परियोजना संचालित की जाएगी.

बाजार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
उन्होंने क्षेत्र में बड़े डेयरी संयंत्र की स्थापना को भी महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन, प्रसंस्करण, बाजार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा.

इस अवसर पर अध्यक्ष, एनडीडीबी ने कहा कि साल 2017 में चंपारण के किसानों को उनके दूध का उचित मूल्य दिलाने के लिए जो पहल की गई थी वो काम कर रही है.

बापूधाम मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (Bapudham Milk Producer Organization) की शुरुआत सही दाम के साथ डेयरी किसानों को सुनिश्चित बाजार और अपनी संस्था का स्वामित्व उपलब्ध हुआ है.

आज बापूधाम चंपारण एवं आसपास के जिलों के 1,500 से अधिक गांवों से प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख लीटर दूध का संकलन कर रहा है.

संस्था से 67,000 से अधिक किसान जुड़े हैं और वर्ष 2017 से अब तक किसानों के बैंक खातों में दूध की बिक्री के एवज में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है.

दूध संकलन में लगातार वृद्धि को देखते हुए क्षेत्र में डेयरी प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है.

प्रस्तावित नए डेयरी संयंत्र की दूध प्रसंस्करण क्षमता 4 लाख लीटर प्रतिदिन होगी, जिसमें लगभग 350 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है.

इससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ दूध संकलन, परिवहन, प्रसंस्करण और स्थानीय आपूर्ति शृंखला से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

सहकारिता को गांव-गांव तक सशक्त करने के राष्ट्रीय संकल्प के तहत एनडीडीबी द्वारा डेयरी सहकारी समितियों के गठन एवं उनके सुदृढ़ीकरण के लिए कार्य किया जा रहा है.

Written by
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