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लाइव अपडेट्स
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अलग-अलग तरह के सीड का किया जा रहा प्रोडक्शन
सीड इकोसिस्टम के बंटवारे को एक बड़े पैमाने पर चलने वाले बिजनेस में बदलना BAIP (बिहार एक्वाकल्चर और लाइवस्टॉक इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट) - जिसे गेट्स फ़ाउंडेशन का सहयोग मिला है और जिसे बिहार सरकार के मत्स्य पालन, डेयरी और पशु संसाधन विभाग द्वारा लागू किया जा रहा है. खास और अलग-अलग तरह के सीड प्रोडक्शन के जरिए मछली के सीड इकोसिस्टम को बदल रहा है. यह मॉडल पहले से ही ज़मीनी स्तर पर असर दिखा रहा है. बेनीपुर में, नर्सरी एक्वाप्रेन्योर प्रकाश चौधरी ने सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन के लिए ऑक्सीजन पैकेजिंग का इस्तेमाल करते हुए एक किसान को 4 प्रति पीस की दर से 75-DOC जयंती रोहू और अमृत कतला सीड (20 kg/100 लाइन) सप्लाई किए.
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है जरूरी

तीसरे राष्ट्रीय सस्टेनेबल कृषि सम्मेलन एवं पुरस्कार समारोह-2026 में अपने संबोधन के दौरान राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह केंद्रीय मंत्री, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी नकहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि किसानों की आय और आजीविका के अवसरों में वृद्धि के बिना इन लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया जा सकता. मंत्री ने कृषि के साथ-साथ डेयरी, पशुपालन और मत्स्यपालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र ग्रामीण परिवारों के लिए आय के स्थायी एवं विविध स्रोत उपलब्ध कराने के साथ-साथ मौसम पर कृषि की निर्भरता को भी कम करते हैं. उन्होंने मत्स्य क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रित प्रयासों और बेहतर अवसंरचना के माध्यम से किसानों की आय तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है.


