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Poultry Disease: अंडा देने वाली मुर्गियों की आंतों में गीले बिछावन की वजह से हो रही ये बीमारी

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पोल्ट्री फॉर्म में मौजूद मुर्गे—मर्गियां. live stock animal news

नई दिल्ली. एक रिसर्च में अंडे देने वाली मुर्गियों (लेयर्स) में आंतों की एक उभरती हुई बीमारी का पता चला है. ‘पोल्ट्री साइंस’ में प्रकाशित केमिन की रिसर्च में भारत में एवियन इंटेस्टाइनल स्पाइरोकीटोसिस (AIS) से जुड़ी मुख्य ब्रैकीस्पाइरा (Brachyspira) प्रजातियों की पहचान की गई है. गीला लिटर (बिछावन), ढीली बीट, गंदे अंडे और अंडे के उत्पादन में बिना किसी स्पष्ट कारण के कमी ये लेयर फार्मों में अक्सर आने वाली चुनौतियां हैं और ये अक्सर मैनेजमेंट, न्यूट्रिशन या पर्यावरण से जुड़े कारणों से जुड़ी होती हैं. हालांकि, आंतों की उभरती हुई बीमारियां कभी-कभी इस तस्वीर का एक अनदेखा पहलू हो सकती हैं.

केमिन के डॉ. आर चंतिरासेकरन (RC) के नेतृत्व में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर जर्नल ‘पोल्ट्री साइंस’ में प्रकाशित एक हालिया पीयर-रिव्यूड स्टडी, एवियन इंटेस्टाइनल स्पाइरोकीटोसिस (AIS) के बारे में महत्वपूर्ण नई जानकारी देती है. यह ब्रैकीस्पाइरा प्रजातियों के कारण अंडे देने वाली मुर्गियों में होने वाली आंतों की एक बीमारी है.

इंडस्ट्री में नई जानकारी का योगदान
एडवांस्ड मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, PCR टेस्टिंग और जेनेटिक कैरेक्टराइजेशन का इस्तेमाल करके, इस स्टडी में भारत के मुख्य पोल्ट्री-उत्पादक क्षेत्रों के उन कमर्शियल लेयर झुंडों की जांच की गई जिनमें बीमारी का संदेह था.

नतीजों से पता चला कि आंतों की सेहत से जुड़ी समस्याओं वाले झुंडों में ब्रैकीस्पाइरा का पता चलने की दर अधिक थी.

इससे यह बात पुख्ता होती है कि जब आंतों की सेहत से जुड़ी लगातार समस्याएं देखी जाएं, तो AIS को भी संभावित बीमारियों की सूची (डिफरेंशियल डायग्नोसिस) में शामिल किया जाना चाहिए.

स्टडी में पाया गया कि प्रभावित झुंडों में आमतौर पर गीले बिछावन, ढीली बीट, वेंट पेस्टिंग (मलद्वार के पास गंदगी चिपकना), गंदे अंडे और उत्पादन क्षमता में थोड़ी कमी जैसे लक्षण दिखाई दिए.

नतीजों से पता चलता है कि जिन लक्षणों को अक्सर सामान्य मैनेजमेंट चुनौतियां माना जाता है, उनमें कुछ मामलों में संक्रमण का पहलू भी हो सकता है, जिसकी और जांच की जानी चाहिए.

रिसर्च में यह भी देखा गया कि उम्रदराज़ झुंडों में इसके मिलने की संभावना अधिक थी, जिससे पता चलता है कि लंबे समय तक चलने वाले लेयर ऑपरेशन्स को आंतों की सेहत की निगरानी और डायग्नोस्टिक्स पर अधिक ध्यान देने से फायदा हो सकता है.

जैसे-जैसे पोल्ट्री इंडस्ट्री आगे बढ़ रही है, सेहत से जुड़ी उभरती चुनौतियों को समझना और भी महत्वपूर्ण हो गया है.

विज्ञान, डायग्नोस्टिक्स और इनोवेशन के माध्यम से, केमिन इंडस्ट्री को उन स्थितियों को बेहतर ढंग से समझने, पहचानने और मैनेज करने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है जो झुंड की सेहत, प्रोडक्टिविटी और मुनाफे पर असर डालती हैं.

Written by
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