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Poultry Farming: मुर्गियों के बिछावन के प्रबंधन का असर मुर्गियों की सेहत और प्रोडक्शन पर पड़ता है

पोल्ट्री शेड के निर्माण के लिए ऊंची भूमि का चयन करना चाहिए. कुछ चट्टान वाली जगह होती है, वे ज्यादा अच्छी होती हैं. शेड ऊंची होती है, तो उसके पास जल का भराव नहीं हो पाएगा.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. सस्टेनेबल पोल्ट्री प्रोडक्शन में ‘लिटर मैनेजमेंट’ याानि मुर्गियों के बिछावन का प्रबंधन एक अहम हिस्सा है. इसका सीधा असर मुर्गियों की सेहत, पर्यावरण की सुरक्षा और आस-पास के लोगों की स्वीकार्यता पर पड़ता है. वहीं पोल्ट्री उत्पादकों के सामने कई चुनौतियां होती हैं, जिनमें मक्खियों का प्रकोप और लगातार आने वाली बदबू को कंट्रोल करना सबसे मुश्किल काम है. ये समस्याएं न सिफ फार्म की साफ-सफाई पर असर डालती हैं, बल्कि इनसे बीमारी फैलने, सरकारी जांच और आस-पास के लोगों के साथ रिश्ते खराब होने का भी खतरा रहता है.

हालांकि फिजिकल और केमिकल तरीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन उनकी कमियां भी साफ तौर पर सामने आ रही हैं, जिससे ज्यादा बेहतर और समग्र समाधानों की जरूरत महसूस हो रही है.

अमोनिया गैस बनने लगती है
लेयर फार्म में लंबे समय तक खाद जमा होती रहती है. इसमें मौजूद ज्यादा ऑर्गेनिक तत्व, नमी और गर्मी मिलकर माइक्रोबियल डीकंपोजिशन यानि सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन के लिए एक आदर्श माहौल बनाते हैं.

इस प्रक्रिया से अमोनिया और वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (VOCs) निकलते हैं, जिनसे खास तरह की बदबू आती है.

साथ ही, खाद मक्खियों, खासकर घरेलू मक्खी (Musca domestica) के पनपने की जगह बन जाती है, जो नमी वाले लिटर में तेजी से बढ़ती है.

ये मक्खियां सिर्फ परेशानी का सबब नहीं हैं, ये साल्मोनेला, ई. कोलाई और कैंपिलोबैक्टर जैसे रोग फैलाने वाले कीटाणुओं को फैलाने का काम भी करती हैं.

वहीं, बदबू न सिर्फ फार्म की हवा की क्वालिटी खराब करती है, बल्कि आस-पास के लोगों की शिकायतों का कारण भी बनती है, जिससे अक्सर सरकारी नियम-कानून से जुड़ी चुनौतियां भी खड़ी हो जाती हैं.

फिजिकल उपाय और उनकी सीमाएं
उत्पादक लंबे समय से इन फिजिकल उपायों पर निर्भर रहे हैं.

मक्खियों के पनपने की जगह को कम करने के लिए बार-बार खाद हटाया जाता है.

बदबू को फैलाने और लिटर को सूखा रखने के लिए वेंटिलेशन सिस्टम लगाए जााते हैं.

मैकेनिकल टर्नर का इस्तेमाल करके लिटर को सुखाया जाता है और हवादार बनाया जाता है.

वयस्क मक्खियों की संख्या कम करने के लिए स्क्रीन और ट्रैप का इस्तेमाल होता है.

हालांकि ये तरीके कुछ समय के लिए राहत देते हैं, लेकिन असल हालात में अक्सर नाकाम हो जाते हैं.

जैसे बार-बार खाद हटाने में बहुत ज्यादा मेहनत और खर्च लगता है, खासकर बड़े पैमाने पर काम करने वाले फार्म में.

वेंटिलेशन से बदबू तो फैल जाती है, लेकिन उसकी जड़ खत्म नहीं होती.

मैकेनिकल तरीके से सुखाने का नतीजा हमेशा एक जैसा नहीं होता, खासकर नमी वाले या बारिश के मौसम में.

स्क्रीन और ट्रैप से वयस्क मक्खियां तो कम हो जाती हैं, लेकिन समस्या की असली वजह—लिटर में मक्खियों का पनपना—खत्म नहीं होता.

Written by
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