नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में ऐसा अक्सर हो जाता है कि रातों-रात मुर्गियां मर जाती हैं. इसके चलते पोल्ट्री फार्मर्स को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ जाता है. क्योंकि मुर्गियों की मौत से मुर्गी पालन का काम घाटे में तब्दील हो जाता है. वैसे तो मुर्गियों की मौत के कई कारण हैं लेकिन मुर्गियों की अचानक मौत के तीन बड़े कारण हैं. जिनके बाारे में जानना मुर्गी पालकों के लिए जरूरी है और मुर्गियों की अचानक मौत से बचाना का समाधान करना भी जरूरी है, तभी पोल्ट्री फार्मिंग में नुकसान से बचा जा सकता है.
एक तो पोल्ट्री फार्मिंग में अमोनिया गैस का साइलेंट अटैक होता है. असल में बिछावन (Litter) में नमी होने और मुर्गियों की बीट गीली रहने से अमोनिया गैस बनती है. यह सांस के जरिए अंदर जाकर आंखों में जलन, फेफड़ों में सूजन और दम घुटने का कारण बनती है.
खतरा और बचाव के बारे में जानें
इससे बचाव के लिए बिछावन यानि धान की भूसी या लकड़ी का बुरादे को सूखा और साफ रखें.
दिन में कम से कम दो बार (सुबह और शाम) बिछावन की रैकिंग (उलट-पलट) करें. गीला होने पर बिछावन को तुरंत बदलें.
शेड के पर्दे एकदम टाइट बंद न करें, ताकि ताजी हवा का संचार बना रहे.
वहीं हीट स्ट्रोक और हीट स्ट्रेस भी दिक्कत करता है. जब तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंता है तो मुर्गियां पसीना न आने के कारण मुंह खोलकर हांफती हैं.
खून गाढ़ा होने और दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने से उनकी अचानक मौत हो जाती है.
अंतिम समय में पानी की तलाश में वे अक्सर बर्तनों के पास झुंड में मृत पाई जाती हैं.
बचाव के लिए फार्म के आसपास पेड़-पौधे लगाएं और छत पर स्प्रिंकलर व शेड में पंखों का उपयोग करें.
दोपहर के तेज तापमान में दाना कम दें और पीने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएं. पानी में इलेक्ट्रोलाइट या नींबू का रस मिलाकर दें.
दोपहर के समय शेड में अनावश्यक आना-जाना बंद रखें ताकि मुर्गियों को तनाव न हो.
बिजली कटना और वेंटिलेशन फेल होना भी बड़ा खतरा है.
आधुनिक पोल्ट्री फार्म्स में एग्जॉस्ट फैन और कूलिंग पैड बंद होते ही कुछ ही मिनटों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है.
मुर्गियां दम घुटने से इधर-उधर भागती हैं और एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर दबने से मर जाती हैं. 15–20 मिनट का पावर कट पूरे फार्म को साफ कर सकता है.
इसलिए फार्म पर ऑटोमैटिक स्टार्ट होने वाले जनरेटर का बैकअप रखें.
जनरेटर उपलब्ध न हो, तो लाइट कटते ही तुरंत शेड के चारों ओर के पर्दे खोल दें ताकि प्राकृतिक ताजी हवा अंदर आ सके.












