नई दिल्ली. पशुपालन के जरिए किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है. बिहार में भी पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि दूध उत्पादन भी बढ़ाया जा सके और किसानों की इनकम को भी. इसको लेकर सरकार कई योजनाएं चला रही है, जिससे किसानों को मदद मिल सके. हाल ही में कैबिनेट ने मुख्यमंत्री गोधन विकास ऋण योजना को मंजूरी दी है. जिसकी मदद से पशुपालन करने में काफी सहूलत मिलेगी. असल में सरकार ने इसमें पशुपालकों को बैंक ऋण के ब्याज पर 100 फीसदी सब्सिडी देने का फैसला लिया है.
इससे पशुपालकों को सिर्फ मूलधन ही चुकाना होगा. लोन की किस्तें दूध बिक्री से खुद-ब-खुद कट जाएंगी. कॉम्फेड इसमें गारंटर की भूमिका निभाएगा. इससे तीन उन्नत गायों या दो भैंसों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और 50 फीसद महिला पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा.
सब्सिडी दे रही है सरकार
▶️ इस योजना को आगामी तीन वर्षों 2026-27 से 2028-29 के लिए स्वीकृत किया गया है.
▶️ इस योजना के लिए 160 करोड़ 10 हजार की अनुमानित लागत व्यय की स्वीकृति दी गयी.
▶️ यदि आप भी पशुपालन करना चाहते हैं और आपके पास धन का अभाव है तो फिर इस योजना का जरूर फायदा उठाएं.
▶️ वहीं दूसरी ओर डेयरी विकास को रफ्तार देने के लिए सरकार ने 126.07 करोड़ की अन्य परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है.
▶️ कोसी क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से सरकार ने ये फैसला लिया है.
▶️ सुपौल, मधेपुरा और सहरसा जिलों में डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए 126.07 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है.
▶️ सात निश्चय-3 के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 में इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जायेगा.
▶️ परियोजनाओं की अनुमानित लागत का 100 प्रतिशत अनुदान राज्य योजना से उपलब्ध कराया जायेगा.
▶️ योजना के तहत नयी दुग्ध सहकारी समितियों (डीसीएस) में पशुपालकों को संगठित दुग्ध व्यवसाय से जोड़ने और उनके उत्पाद के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
▶️ साथ ही दूध के संग्रहण और उसे सुरक्षित तरीके से प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाने के लिए मिल्क चिलिंग एवं बीएमसीयू से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जायेगा.
▶️ आधुनिक दही और प्रीमियम आइसक्रीम प्लांट की स्थापना से दूध का स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन किया जा सकेगा.
▶️ वहीं, टीएमआर प्लांट और भैंस हीफर फार्म के माध्यम से पशुओं के पोषण एवं डेयरी उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है.













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