नई दिल्ली. IIT खड़गपुर रिसर्च पार्क, कोलकाता में NDDB की ‘पूर्वी क्षेत्र में खाद्य तेल वैल्यू चेन को मजबूत करने की पहल’ के लॉन्च के मौके पर, पश्चिम बंगाल सरकार के कृषि विपणन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल जैसी तिलहनी फसलों की खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के राज्य के लक्ष्य पर जार दिया. इसके साथ ही दूध उत्पादन और गुणवत्ता को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने सुझाव दिया कि मौजूदा डेयरी सहकारी नेटवर्क को तिलहन उत्पादन से जोड़ा जाए ताकि किसानों की आजीविका को और बेहतर बनाया जा सके.
उन्होंने किसानों के लिए प्रशिक्षण, ऋण सहायता और बीमा सुविधाओं की व्यवस्था करने की आवश्यकता पर भी जोर देने की बात कही. मंत्री घोष ने पश्चिम बंगाल में आकार ले रहे सहकारी आंदोलन के बारे में बात करते हुए कहा कि यह आम लोगों और किसानों के जीवन को बदल देगा.
किसानों को मिलना चाहिए मेहनत का फायदा
उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि इसका प्रबंधन सही ढंग से किया जाना चाहिए ताकि किसानों को उनकी कड़ी मेहनत का अधिकतम लाभ मिल सके.
साथ ही व्यवस्था से शोषण को खत्म किया जा सके. उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के साथ सहयोग से छोटे किसानों को बेहतर मोल-भाव करने की शक्ति (बार्गेनिंग पावर) मिलेगी.
NDDB की विशेषज्ञता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि NDDB और IIT खड़गपुर की साझेदारी किफायती तकनीकें लाएगी और खाद्य तेलों की खरीद और विपणन को आसान बनाएगी.
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग उम्मीद करते हैं कि NDDB राज्य के कृषि बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाएगा.
उन्होंने भरोसा जताया कि यह संगठन सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करेगा और बेहतर बाज़ार पहुंच, कम नुकसान और ज़्यादा वैल्यू एडिशन के जरिए किसानों के कल्याण को बढ़ाएगा.
वहीं NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि इस अहम बैठक में राज्य में सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने की आगे की राह पर चर्चा की गई है.
चर्चा में पश्चिम बंगाल में डेयरी के बड़े लेकिन अब तक इस्तेमाल न किए गए पोटेंशियल का फायदा उठाकर ‘श्वेत क्रांति 2.0’ (White Revolution 2.0) को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने पर भी विमर्श हुआ.
साथ ही किसानों को बेहतर रिटर्न दिलाने के लिए स्थानीय सहकारी समितियों को मजबूत करने और मिल्क यूनियन ब्रांडों को एक साथ लाने जैसे मुद्दों पर बात हुई.
इसके अलावा तिलहन और दालों में मौजूद मौकों और ‘नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड’ के ‘भारत ऑर्गेनिक्स’ ब्रांड के जरिए ऑर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई.













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