नई दिल्ली. पुडुचेरी के मुख्यमंत्री श्री एन. रंगासामी ने फिशरीज सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए कई अहम ऐलान किए. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, निर्यात में वृद्धि करने और मछुआरों की आजीविका में सुधार लाने के लिए कई पहलें लागू कर रही है. उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए लगभग 130 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और डीजल सब्सिडी, नाव सब्सिडी, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि में सहायता, वृद्धावस्था सहायता और शैक्षिक सहायता के माध्यम से मछुआरों को मिल रहे लाभों पर जोर दिया.
उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार मछुआरा परिवारों के बच्चों की स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक पूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में मत्स्य पालन क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने मछुआरों से पीएमएमएसवाई सहित विभिन्न योजनाओं के तहत बनाए जा रहे बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया और मत्स्य पालन समुदाय के दीर्घकालिक लाभों को सुनिश्चित करने के लिए इसके उचित रखरखाव की आवश्यकता पर बल दिया.
600 से अधिक मछुआरे परिवारों को मिलेगा फायदा
▶️ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत पुडुचेरी सतत और अवसंरचना-आधारित मत्स्य विकास के लिए एक आदर्श के रूप में उभर रहा है.
▶️ समृद्ध समुद्री संसाधनों और जीवंत मत्स्य पालन समुदाय से संपन्न इस केंद्र शासित प्रदेश में आधुनिक मत्स्य पालन अवसंरचना में महत्वपूर्ण निवेश किया गया है.
▶️ जिसमें थेनगैथिट्टू मत्स्य बंदरगाह का उन्नयन और नल्लावडु में अत्याधुनिक मछली लैंडिंग केंद्र की स्थापना शामिल है.
▶️ इन सुविधाओं से मछली के प्रबंधन, नावों को किनारे लगाने, नीलामी और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है.
▶️ जिससे तटीय क्षेत्र के हजारों मछुआरों और 600 से अधिक मछुआरे परिवारों को लाभ हुआ है.
▶️ मत्स्य पालन क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए, भारत सरकार ने पीएमएमएसवाई के तहत क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण अपनाया है.
▶️ इसके तहत कराईकल को मत्स्य बंदरगाह क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है और कराईकल में 119.94 करोड़ के निवेश से एक स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य बंदरगाह के विकास का कार्य शुरू किया गया है.
▶️ यह परियोजना सुरक्षित पोत ठहराव, स्वच्छ मछली प्रबंधन और कुशल मछली विपणन के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करेगी, साथ ही मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला में परिचालन दक्षता में सुधार करेगी.
▶️ एकीकृत क्लस्टर दृष्टिकोण बुनियादी ढांचे, वित्त, प्रौद्योगिकी, मूल्यवर्धन और बाजारों तक बेहतर पहुंच के माध्यम से मछली पालक उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) और मत्स्य सहकारी समितियों के विकास को भी बढ़ावा देगा.
▶️ जिससे मूल्य श्रृंखला में सामूहिक भागीदारी संभव होगी, पुडुचेरी की अप्रयुक्त मत्स्य पालन क्षमता का दोहन होगा.
▶️ मछुआरों की आय में वृद्धि होगी और तटीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित होंगे.












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