नई दिल्ली. पशुपालन हो पोल्ट्री या फिर मछली पालन इसको अगर वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो फायदा ज्यादा मिलता है. कहने का मतलब ये है कि वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन बेहतर होता है और नतीजे में पशुपालकों, मुर्गी पालकों और मछली पालकों को उनकी लागत को ज्यादा मुनाफा मिलता है. बस जरूरत इस बात है कि पशुपालकों, मुर्गी पालकों और मछली पालकों के बीच वैज्ञानिक तरीकों की समझ पैदा करना, ताकि वो इस तक पहुंचकर बेहतर रिजल्ट हासिल कर सकें. वहीं इसको लेकर गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना और कॉग्नीसोल एगटेक प्राइवेट लिमिटेड ने एक पहल की है.
गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना और कॉग्नीसोल एगटेक प्राइवेट लिमिटेड (‘अपनी खेती’) ने डिजिटल एक्सटेंशन सर्विस को मजबूत करने और किसानों व पशुपालकों के बीच वैज्ञानिक जानकारी और तकनीकों को बड़े पैमाने पर फैलाने में मदद करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस MoU पर एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल और कॉग्नीसोल एगटेक प्राइवेट लिमिटेड (‘अपनी खेती’) के पार्टनरशिप और एलायंस लीड श्री चमकौर सिंह ने वाइस-चांसलर डॉ. जे.पी.एस. गिल की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए.
डिजिटल प्लेफॉर्म से मिलेगा फायदा
कॉग्नीसोल एगटेक प्राइवेट लिमिटेड ‘अपनी खेती’ चलाती है, जो किसानों पर केंद्रित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है.
यह प्लेटफॉर्म विशेषज्ञों की सलाह, भरोसेमंद जानकारी, असली उत्पाद और बाज़ार से जुड़ाव जैसी सुविधाएँ देता है.
16 लाख से ज्यादा किसान अपने मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए ‘अपनी खेती’ से जुड़े हुए हैं.
इस MoU का मकसद पशुपालन, पोल्ट्री और मछली पालन से जुड़ी भरोसेमंद और वैज्ञानिक जानकारी तक पहुंच बेहतर बनाकर किसानों और पशुपालकों को डिजिटल समाधान देना है.
इससे किसानों को बड़े डिजिटल नेटवर्क के जरिए वेट यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित उत्पादन तकनीकों और नई खोजों को सीखने में मदद मिलेगी.
यह सहयोग तकनीकी सलाह, ट्रेनिंग और एक्सटेंशन सर्विस तक बेहतर पहुंच के साथ यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों और किसान समुदायों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा.
वाइस-चांसलर डॉ. जे.पी.एस. गिल ने इस पहल की तारीफ़ की और किसानों को समय पर वैज्ञानिक जानकारी देने में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की भूमिका पर जोर दिया.
उन्होंने बताया कि यह साझेदारी किसान-विशेषज्ञ संबंधों को मज़बूत करेगी और पशुपालन, पोल्ट्री और मछली पालन के क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च, एक्सटेंशन और आउटरीच गतिविधियों को आसान बनाएगी.













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