नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन और दुग्ध विकास विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने वर्ल्ड रेबीज डे के अवसर पर रेबीज की रोकथाम, प्राथमिक उपचार और जागरूकता को लेकर कई अहम बाते कहीं. उन्होंने कहा कि रेबीज को लेकर गंभीरता और जागरूकता का अभाव हमारे समाज में है. खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर रेबीज को गंभीरता से नहीं लिया जाता है. जबकि रेबीज 100 फीसद जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर प्राथमिक उपचार और जानकारी के अभाव में लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं. हालांकि भारत में रेबीज के कारण होने वाली जनहानि को सही जानकारी और सजगता से पूरी तरह रोका जा सकता है.
उन्होंने आगे कहा कि आम तौर पर लोग यह मानते हैं कि रेबीज बीमारी केवल कुत्तों के काटने से फैलती है. जबकि ये बीमारी कुत्तों के अलावा बिल्लियां, बंदर, जंगली जानवर या वो गाय-भैंस जैसे पालतू मवेशी भी जो रेबीज से संक्रमित हैं उनसे इंसानों में खतरा फैल सकती है.
घरेलू नुस्खों से बचने की चेतावनी
▶️ ग्रामीण इलाकों में घाव पर सरसों का तेल, नारियल तेल, कपूर या जड़ी-बूटियां लगाने की परिपाटी देखने को मिलती है. जो बेहद खतरनाक और अप्रभावी है.
▶️ कुत्ता काटने के तुरंत बाद का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, इसलिए इन भ्रांतियों से दूर रहने की आवश्यकता है.
▶️ किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन (Soap) से अच्छी तरह धोना चाहिए. धोने के तुरंत बाद एंटीसेप्टिक लगाना चाहिए.
▶️ बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल/चिकित्सा केंद्र जाकर तय शिड्यूल (जैसे 0, 3, 7, 14, 28 दिन) के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) का पूरा कोर्स लगवाना चाहिए.
▶️ जो लोग नियमित रूप से जानवरों के संपर्क में रहते हैं, उनका इलाज करते हैं या डॉग हैंडलर हैं, उन्हें पहले से ही प्री-एक्सपोजर वैक्सीनेशन (प्रतिरक्षण) कराकर सुरक्षित रहना चाहिए.
▶️ रेबीज बीमारी दो रूपों में देखा जाती है, एक आक्रामक (Furious) और दूसरा सुस्त/शांत (Dumb), जिसमें सुस्त रूप वाले जानवर की पहचान करना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है.
▶️ एक रेबीज संक्रमित कुत्ता लगभग 40 किलोमीटर के दायरे में अन्य जानवरों और मनुष्यों में संक्रमण फैला सकता है, इसलिए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निगरानी जरूरी है.
▶️ ’वन हेल्थ’ दृष्टिकोण और सामूहिक प्रयास से रेबीज उन्मूलन के लिए मानव स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को एक साथ मिलकर काम करना होगा.
▶️ उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया और विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए जन-जन तक यह संदेश पहुंचाना आवश्यक है.













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