नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पशुधन बीमा पोर्टल का शुभारंभ किया. जिससे अब पशुपालकों और किसानों के लिए बीमा सेवाओं का उपायोग आसान हो जाएगा. इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल और विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार भी मौजूद रहे. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पोर्टल पशुपालकों एवं किसानों के लिए बीमा सेवाओं को सरल, पारदर्शी, सुगम एवं तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
उन्होंने आगे कहा कि इसके माध्यम से बीमा पंजीकरण, पशु सत्यापन, पॉलिसी जारी करना, प्रीमियम प्रबंधन, दावे का पंजीकरण, दावों का निस्तारण एवं निगरानी जैसी विभिन्न प्रक्रियाएं एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध होंगी। पोर्टल को भारत पशुधन पोर्टल से जोड़ा गया है तथा यह 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है. डिजिटल ट्रैकिंग एवं निर्धारित समय-सीमा के माध्यम से बीमा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने का प्रयास किया गया है.
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इस अवसर पर राजीव रंजन सिंह ने कहा कि अब किसानों को बीमा अथवा दावे के लिए दस्तावेज लेकर कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
पंजीकरण के पश्चात पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और किसानों को बीमा प्रीमियम में 15 प्रतिशत का अंशदान करना होगा.
उन्होंने कहा कि केवल पोर्टल का शुभारंभ पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसकी जानकारी विभागीय पोर्टल, सोशल मीडिया एवं फील्ड वर्कर्स के माध्यम से प्रत्येक किसान तक पहुंचाना भी आवश्यक है.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 से अब तक एक करोड़ से अधिक पशुओं का बीमा किया जा चुका है और इस वर्ष 30 लाख से अधिक किसानों ने बीमा कराया है.
उन्होंने बीमा कवरेज को और अधिक व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए सभी अधिकारियों, बीमा कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों एवं पशु चिकित्सकों से पोर्टल के व्यापक प्रचार-प्रसार का आह्वान किया.
प्रो. एस. पी. सिंह बघेल जी ने कहा कि बाढ़, बीमारी एवं अन्य परिस्थितियों में पशुओं की मृत्यु से पशुपालक परिवार की आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ता है.
ऐसे में पशुधन बीमा किसानों एवं पशुपालकों के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है.
उन्होंने कहा कि पोर्टल के माध्यम से बीमा एवं मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल होगी, लेकिन केवल पोर्टल का निर्माण पर्याप्त नहीं है.
इसकी जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता आवश्यक है.
इस कार्य में गांवों में किसानों के निरंतर संपर्क में रहने वाले कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
अपर सचिव सुश्री वर्षा जोशी जी, एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह, डॉ. नवीना. बी. महेश्वरप्पा, पशुपालन आयुक्त (एएचसी) तथा डॉ. मुथुकुमारसामी बी., संयुक्त सचिव (एनएलएम/एसडी) की गरिमामयी उपस्थिति रही।













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