नई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी उत्पादन मंत्रालय के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने पिछले दिनों तमिलनाडु के अपने दौरे पर समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने, तटीय आजीविका को मजबूत करने और देश में समुद्री शैवाल मूल्य श्रृंखला के विकास में तेजी लाने के लिए विभाग के प्रयासों के बारे में जानकारी दी. वहां आयोजित एक बैठक में समुद्री शैवाल की खेती पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई और इस क्षेत्र में उत्पादन, मूल्यवर्धन और बाजार संबंधों को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई. इस संवाद के दौरान, किसानों ने तमिलनाडु में अपनाई जाने वाली विभिन्न कृषि तकनीकों, जिनमें मोनोलाइन और राफ्ट आधारित विधियाँ शामिल हैं, के बारे में बताया और विभिन्न कृषि, रखरखाव और कटाई कार्यों का प्रदर्शन किया.
डॉ. अभिलक्ष लिखी ने समुद्री शैवाल की खेती के माध्यम से स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करने में महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों के योगदान की सराहना की और सदस्यों को उत्पादन बढ़ाने, अधिक किसानों को संगठित खेती में शामिल करने और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसवाई) सहित सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया.
समुद्री शैवाल की खेती की संभावनाएं बढ़ाई जा रही हैं
उन्होंने कहा कि भारत में समुद्री शैवाल की खेती की अपार संभावनाएं हैं और कहा कि देश की 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा इस क्षेत्र के बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करती है.
अनुसंधान संस्थानों ने तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समुद्री शैवाल की खेती के लिए 24,707 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 384 उपयुक्त स्थलों की पहचान की है.
डॉ. लिखी ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, समुद्री शैवाल की खेती को रोजगार सृजन और मछुआरों तथा तटीय समुदायों की आय बढ़ाने के लिए एक प्राथमिकता वाली गतिविधि के रूप में चिन्हित किया गया है.
वर्ष 2020-27 की अवधि के दौरान, समुद्री शैवाल विकास के लिए 181.11 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इसमें तमिलनाडु में एक समुद्री शैवाल पार्क की स्थापना भी शामिल है.
37,255 समुद्री शैवाल संवर्धन राफ्ट और 44,080 समुद्री शैवाल संवर्धन मोनोलाइन इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, साथ ही बीज बैंकों, जागरूकता, प्रशिक्षण और क्षमता विकास पहलों के लिए भी सहायता दी गई है.
बता दें कि भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था पहलों के तहत समुद्री शैवाल की खेती एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र बनकर उभरी है.
क्योंकि इसमें आजीविका सृजन, तटीय समुदाय के विकास और समुद्री आधारित जैव-अर्थव्यवस्था गतिविधियों को बढ़ावा देने की अपार क्षमता है.
भारत में समुद्री शैवाल का उत्पादन वर्ष 2015 में 18,890 टन से बढ़कर वर्ष 2024 में 74,083 टन और वर्ष 2025 में 82,728 टन हो गया है.












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