नई दिल्ली. बिहार में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार उन्नत नस्ल की गाय-भैंस की खरीद करेगी. कहा जा रहा है कि इससे पहले गाय-भैंस की डीएनए जांच कराई जाएगी. आनुवांशिकी जांच के साथ ही टीकाकरण रिकॉर्ड भी देखा जाएगा. उसके बाद ही पशुपालकों को दुधारू पशु दिए जाएंगे. डीएनए की जांच एनडीडीबी की ओर से तैयार किट से की जाएगी. राज्य सरकार ने इस वर्ष डीएनए जांच कर 50 हजार दुधारू पशु खरीदने का निर्णय लिया है. तीन वर्ष में एक लाख पशु खरीदे जाएंगे. जिन नस्ल के दुधारू पशु खरीद का निर्णय लिया गया है, उसमें क्रॉस जर्सी, गिर, साहिवाल, मुर्रा आदि शामिल हैं.
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मुख्यमंत्री गौ धन विकास ऋण योजना के तहत तीन वर्ष में एक हजार करोड़ खर्च करने का निर्णय लिया है. योजना के तहत एक एक किसान को एक जबकि एक समिति को पांच पशु दिए जाएंगे. एक दुग्ध उत्पादक समिति को अधिकतम पांच पशु, जिसमें तीन गाय और दो भैंस के लिए योजना का फायदा मिलेगा.
बैंक से लोन लेकर खरीदेंगे पशु
इस योजना का लाभ 50% महिला पशुपालकों को दिया जाना है. किसान बैंक से लोन लेकर पशु खरीदेंगे. कॉम्फेड गारंटर बन कर बैंकों से लोन दिलाएगा.
दुग्ध उत्पादक समितियों से जुड़े आठ लाख पशुपालक किसान इस योजना योग्य होंगे. फायदा पाने वालों की उम्र 40 वर्ष से कम होनी चाहिए.
जांच के तरीके की बात की जाए तो राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा विकसित किट से पता चलेगा कि गाय या भैस कितना दूध देने में सक्षम है.
खून का सैंपल लेने के 21 दिन बाद इसकी डीएनए रिपोर्ट मिलेगी. यह भी जांचा जायेगा कि पशुओं में ब्रुसेला रोग तो नहीं है.
ब्रुसेला रोग से ग्रसित पशु कभी गर्भधारण नहीं करते हैं. इसलिए इस रोग से ग्रसित पशुओं को जांच के जरिए छांट दिया जाएगा.
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक का कहना है कि राज्य में प्रतिदिन एक करोड़ लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य है.
इसके लिए उन्नत नस्ल की गाय और भैंस की खरीद जरूरी है. राष्ट्रीय स्तर के फार्म से उन्नत नस्ल की दुधारू पशुओं की खरीद कर किसानों को दिए जाएंगे.
सरकार एनडीडीबी की नेशनल डेयरी सर्विसेज द्वारा उन्नत नस्ल के पशु खरीदेगी. कम से कम 15 लीटर देने वाली गाय और 10 लीटर दूध वाली भैस होनी चाहिए.
निष्कर्ष
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मुहिम से दूध उत्पादन बढ़ेगा. जिससे पशुपालकों की आय भी बढ़ेगी. वहीं उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या भी बढ़ेगी. जबकि ग्रामीण स्तर पर रोजगार बढ़ेगा.












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