नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग को कुछ पोल्ट्री फार्मर मीट उत्पादन के लिए करते हैं और कुछ अंडा उत्पादन के लिए लेकिन इस काम को यदि अंडा और मीट दोनों उत्पादन के लिए किया जाए तो फिर मुनाफा और अच्छा हो सकता है. हालांकि इसके लिए जरूरी है कि उस तरह के पक्षी का चयन किया जाए. बर्ड में दोनों खूबियां हों, मसलन अंडा उत्पादन करे और उसे मीट के लिए भी बेचा जा सके. पोल्ट्री एक्सपर्ट कहते हैं कि इसके लिए ‘वनराजा’ प्रजाति के पक्षी बेहद ही उपयोगी होते हैं. जो एक बेहतरीन ‘डुअल पर्पस’ (अंडे और मीट दोनों) और लो इनपुट टेक्नोलॉजी वाली किस्म है.
ये कलर्ड पक्षी अपनी पूरी उत्पादकता आयु में 150 से 160 भूरे रंग के अंडे देते हैं और ग्रामीण परिवेश की विषम परिस्थितियों, जैसे अधिक ठंड, गर्मी या आद्रता में भी घर के बचे भोजन से आसानी से पल जाते हैं. कम लागत और हर मौसम में ढलने की खूबी के कारण हमारे किसान भाई इन्हें पालकर अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ परिवार की प्रोटीन की कमी को भी आसानी से पूरा कर सकते हैं.
हर मौसम को सहन करने की होती है ताकत
राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र चक गजरिया स्थित निबलेट, बाराबंकी के डॉ. राकेश कुमार बताते हैं कि इसे केंद्रीय संस्थान प्रोजेक्ट डायरेक्टरेट ऑन पोल्ट्री (PDP), हैदराबाद द्वारा विशेष रूप से ग्रामीण और बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग के लिए विकसित किया गया है.
यह लो इनपुट टेक्नोलॉजी (Low Input Technology) वाला डुअल पर्पस पक्षी है. जिसका मतलब है कि यह अंडे और मांस (मीट) दोनों के बेहतरीन उत्पादन के लिए उपयोगी है.
यह रंग-बिरंगी (कलर्ड) पक्षी हैं और भूरे (ब्राउन) रंग के अंडे देती हैं. अपनी पूरी उत्पादकता आयु के दौरान यह औसतन 150 से 160 अंडे देती है.
यह भारतीय ग्रामीण परिवेश और विषम जलवायु परिस्थितियों (अत्यधिक ठंड, गर्मी और उमस/आर्द्रता) को आसानी से सहन कर लेती है.
इन्हें महंगे कमर्शियल फीड के बजाय खुले में चरने (फ्री-रेंज) और घर के बचे हुए भोजन, अनाज व वेस्टेज पर भी आसानी से पाला जा सकता है.
ग्रामीण किसान व पशुपालक भाई इसे न्यूनतम लागत में पालकर अपने परिवार में प्रोटीन/पोषण की आवश्यकता पूरी कर सकते हैं.
बाजार में इसके अंडे व मीट बेचकर अतिरिक्त आय कमा सकते हैं. जिसका सीधा सा मतलब है कि दोगुनी होगी.
निष्कर्ष
वनराजा पक्षी को पालने में लागत भी कम आती है. जिससे पोल्ट्री फार्मिंग में फायदा बढ़ जाता है. क्योंकि इस काम में 70 फीसद तक फीड पर आता है. फ्रीरेंज में पक्षी को अगर छोड़ा जाता है तो फीड के खर्च को कम किया जा सकता है.











Leave a comment