नई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्यपालन विभाग के सचिव, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी का आधिकारिक दौरा किया. इस दौरे का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में ठंडे पानी में मछली पालन (कोल्डवॉटर एक्वाकल्चर) के विकास की प्रगति की समीक्षा करना था. इस दौरे के दौरान, सचिव ने मुनस्यारी के ‘जौहर मत्स्य स्वायत्त सहकारिता’ और ‘नमजाला ट्राउट फार्म’ में ट्राउट मछली पालने वाले किसानों से बातचीत की. उन्होंने ‘रेनबो ट्राउट’ पालन को आजीविका के एक टिकाऊ विकल्प के रूप में अपनाने में स्थानीय सहकारी समितियों की अग्रणी भूमिका की सराहना की.
इस दौरान बताया कि गोरी गंगा की बर्फीली धाराओं और अनुकूल पानी के तापमान के कारण मुनस्यारी ‘रेनबो ट्राउट’ पालन के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में उभरा है, जिसने यहां की पारंपरिक खेती को एक अर्ध-व्यावसायिक उद्यम में बदल दिया है. डॉ. लिखी ने ट्राउट मछली पालने वाले किसानों से चर्चा की, जिन्होंने इस क्षेत्र में ट्राउट पालन को लेकर अपने अनुभव और विचार साझा किए.
34 मछली पालन क्लस्टरों को किया अधिसूचित
भारत सरकार ने देश भर में 34 मछली पालन क्लस्टरों को अधिसूचित किया है. पीएमएमएसवाई के तहत पिथौरागढ़ को ‘शीतजल मत्स्यपालन क्लस्टर’ के रूप में अधिसूचित किया गया है.
इसमें मछली मत्स्यपालन सहकारी समितियों को मजबूत करने, आजीविका के अवसर बढ़ाने और हिमालयी क्षेत्र में टिकाऊ मत्स्य विकास को बढ़ावा देने की काफी संभावनाएं हैं.
मछली पालन विभाग के सचिव का यह दौरा उत्तराखंड तथा अन्य हिमालयी क्षेत्रों में ट्राउट मछली पालन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
उत्तराखंड सरकार का मत्स्यपालन विभाग नेपाल को ट्राउट मछली का निर्यात कर रहा है.
साथ ही, उत्तराखंड सरकार और आईटीबीपी के बीच हुए एक समझौते ज्ञापन के तहत, मत्स्यपालन विभाग आईटीबीपी को भी ट्राउट मछली की आपूर्ति कर रहा है.
असल में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में ठंड पानी इस तरह की मछली के लिए उपयोगी स्थान हैं.
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) के तहत ठंडे पानी वाले क्षेत्रों में 2,299 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है.
इस निवेश से रेसवे, हैचरी, फीड मिल, कोल्ड स्टोरेज और मछली पकड़ने के बाद के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिला है.
इस दौरे ने सीमावर्ती गांवों में ट्राउट पालन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को भी रेखांकित किया.
इससे आजीविका के विविध अवसर प्राप्त हुए हैं, इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिला है, और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ एक सुनिश्चित संस्थागत बाजार संबंधी जुड़ाव भी स्थापित हुआ है.










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