नई दिल्ली. बिहार सरकार पशुपालन और डेयरी सेक्टर से किसानों को जोड़कर उनकी इनकम को बढ़ाना चाहती है. इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं डेयरी सेक्टर में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने की भी घोषणा सरकार की ओर से हाल ही में की गई है. गौरतलब है कि मौजूदा समय में करीब 12 लाख किसान दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं. सरकार का मानना है कि इसको कई और गुना बढ़ाना होगा. यही वजह है कि अब इस संख्या को बढ़ाकर 50 लाख से अधिक करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके तहत महिलाओं को सुधा सखी, जीविका सुधा बिक्री केंद्र और दूध प्रोसेसिंग केंद्रों से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा.
इतना ही नहीं पशु चिकित्सा में प्राथमिक दायित्व सुधा सखियों को सौंपने की तैयारी चल रही है. सहकार से समृद्धि योजना के तहत गांव में डेयरी उत्पादक सहकारी समिति का गठन किया जा रहा है. इसके लिए सुधा सखियों को पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, संतुलित पशु आहार एवं कृत्रिम गर्भाधान से जुड़ी आवश्यक सेवाओं का प्रशिक्षण दिया गया. इससे प्राथमिक पशु स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुगम हो सकेगी.
दूध उत्पादन से होगा फायदा
पशुपालकों को आवश्यक पशु स्वास्थ्य एवं पशुपालन संबंधित जानकारी उपलब्ध होगी. इसका सीधा लाभ दूध के उत्पादन पर होगा.
वहीं बिहार में ग्रामीण महिलाओं के अनौपचारिक व अवैतनिक श्रम को पहचान देने के लिए बिहार सरकार, जीविका और कॉम्फेड (सुधा) ने एक ऐतिहासिक पहल की है.
‘सात निश्चय-3’ और ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत राज्य की सभी 8,053 पंचायतों में जीविका सुधा बिक्री केंद्र और गांव स्तर पर प्रशिक्षित “सुधा सखी” तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है.
कॉम्फेड द्वारा आयोजित 6-दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण लेकर लौटीं जीविका दीदियां अब पशुपालन के वैज्ञानिक तरीके सीख चुकी हैं.
मुजफ्फरपुर की सुनीता देवी और पटना की मंजू देवी बताती हैं कि प्रशिक्षण में पशुओं की बीमारियों की पहचान सीखने को मिला है.
साथ ही प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) और लैक्टोमीटर व आधुनिक मशीनों से फैट जांचने की पारदर्शी प्रक्रिया सिखाई गयी है.
इससे किसानों के साथ धोखाधड़ी रुकेगी और महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है. जिससे अन्य महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़ेंगी.
दोहरी कमाई और डिजिटल सशक्तीकरण योजना के तहत इंटरमीडिएट पास महिलाओं को “पशु औषधि केंद्र” और डिजिटल “बैंक मित्र” के रूप में काम करने का अवसर दिया जा रहा है.
सारण की रीना सिंह बताती हैं कि पीओएस मशीन के जरिए दूध की राशि सीधे खाते में जायेगी, जिससे नकद निकासी और जेनेरिक दवाओं की बिक्री से दोहरे स्रोतों से नियमित आय होगी.










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