नई दिल्ली. देश में डेयरी सेक्टर ग्रोथ कर रहा है. दूध उत्पादन में दुनिया में हम नंबर वन है लेकिन इसके साथ ही मीथेन उत्सर्जन की समस्या भी है. NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO), कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष (IFAD) और विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया. जहां उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए क्या हो रहा है, उस बारे में बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश के रूप में, भारत में मुख्य रूप से छोटे स्तर की डेयरी प्रणाली है और यहाँ पशुओं की एक बड़ी आबादी मौजूद है.
डॉ. शाह ने किसानों की आय को बनाए रखने और बढ़ाने के साथ-साथ, पशुओं से होने वाले मीथेन उत्सर्जन की चुनौतियों से निपटने के लिए ‘जलवायु-अनुकूल’ (क्लाइमेट रेजिलिएंट) तरीकों की आवश्यकता पर जोर दिया. साथ ही NDDB की पहलों के बारे में बताया, जिसमें ‘रेशन बैलेंसिंग प्रोग्राम’ (आहार संतुलन कार्यक्रम) शामिल है. यह कार्यक्रम पशुओं के चारे की लागत को कम करता है, दूध उत्पादन क्षमता में सुधार करता है और मीथेन उत्सर्जन को घटाता है.
ईंधन की जरूरत भी हो रही है पूरी
उन्होंने किसानों के स्तर पर बायोगैस प्लांटो के माध्यम से ‘मैन्योर वैल्यू चेन’ विकसित करने की बात कही, जो घरों में खाना पकाने की जरूरतों को पूरा करते हैं. इसके साथ ही, उन्होंने केंद्रीकृत ‘कंप्रेस्ड बायोगैस’ (CBG) संयंत्रों का भी जिक्र किया.
जो डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट की ऊर्जा जरूरतों और वाहनों के लिए ईंधन की आवश्यकता को पूरा करते हैं, और साथ ही जैविक खाद का उत्पादन भी करते हैं.
इससे जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान होने के साथ-साथ किसानों के लिए अतिरिक्त मूल्य भी सृजित होता है.
दुग्ध उत्पादन में भारत की अग्रणी स्थिति को बनाए रखने के संदर्भ में, डॉ. शाह ने पशु उत्पादकता के तीन समान रूप से महत्वपूर्ण स्तंभों की पहचान की, प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य.
उन्होंने जोर देकर कहा कि पशु उत्पादकता बढ़ने का अर्थ है कम पशुओं से अधिक दूध प्राप्त करना, जो स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
उन्होंने वैज्ञानिक प्रजनन में हुई प्रगति का उल्लेख किया, जिसमें कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन), ‘सेक्स सॉर्टेड सीमेन’ तकनीक और जीनोमिक चिप्स शामिल हैं.
कहा कि डेयरी वैल्यू चेन से जुड़ी चुनौतियों पर निष्पक्ष, पारदर्शी और डिजिटल रूप से सक्षम दुग्ध खरीद प्रणालियों के माध्यम से किसानों का विश्वास जीता गया है.
उन्होंने दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए खरीद से लेकर उपभोक्ता तक एक कुशल ‘कोल्ड चेन’ (शीत श्रृंखला) की आवश्यकता पर जोर दिया.
साथ ही, उन्होंने डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट में बेहतर ऊर्जा उपयोग और परिचालन दक्षता (ऑपरेशनल एफिशिएंसी) सुनिश्चित करने की बात भी कही.












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