नई दिल्ली. लंपी स्किन रोग एक विषाणु से होने वाली बीमारी है. उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग की ओर से जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया है कि इससे घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. यदि आपके पशुओं में इसके लक्षण दिखाई दें, तो उनके आसपास साफ-सफाई रखें और नीम के पानी से उन्हें नहलाएं. स्वस्थ पशुओं के लिए लंपी का खास टीका पूरी तरह से उपलब्ध है, जिसे लगावाएं. सहूलत के लिए पशुपालन विभाग द्वारा घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है और प्रभावित क्षेत्रों के आसपास वैक्सीनेशन भी किया जा रहा है. किसी भी सहायता या जानकारी के लिए तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें.
इसके लक्षणों की बात की जाए तो लंपी स्किन डिसीज एक विषाणु से होने वाली बीमारी है. इसमें पशु को तेज बुखार, आंख व नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन, पूरे शरीर में कठोर एवं चपटी गांठ आदि दिखाई देती है. गांठ (नोड्यूल) नेक्रोटिक और अल्सरेटिव भी हो सकते हैं जिससे मक्खियों द्वारा अन्य स्वस्थ पशुओं में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
रोग प्रकोप के समय क्या करें, जानें यहां
▶️ एक्सपर्ट के मुताबिक इसमें पशुओं का वजन घट जाता है, शरीर कमजोर हो जाता है एवं अत्यधिक कमजोरी से पशु की मृत्यु भी हो सकती है.
▶️ गाभिन पशुओं में गर्भपात हो सकता है, दुधारू गायों में दुग्ध उत्पादन काफी कम हो जाता है.
▶️ बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर सबसे पहले नजदीकी पशु चिकित्साधिकारी को सूचित करें.
▶️ इसके बाद प्रभावित पशु को स्वस्थ पशु से अलग करें.
▶️ प्रभावित पशुओं का आवागमन रोक दें. उसे चारने के लिए भी न ले जाएं.
▶️ पशुओं को इस दौरान साफ पानी ही पिलाएं.
▶️ यदि बीमार पशु का दूध पी रहे हैं तो उसके दूध को उबाल कर पिएं.
▶️ पशुओं को मच्छरों, मक्खियों, किलनी आदि से बचाने के लिए पशुओं के शरीर पर कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें.
▶️ बीमार पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्ति को भी स्वस्थ पशुओं के बाड़े से दूर रहना चाहिए.
▶️ पहले स्वस्थ पशुओं को चारा व पानी दें, फिर बीमार पशुओं को दें.
इन बातों का भी ध्यान दें
▶️ एक साथ चराई के लिए अपने पशुओं को भेजें
▶️ पशु मेला और प्रदर्शनी में अपने पशुओं का ना भेजें.
▶️ बीमार और स्वस्थ पशुओं को एक साथ चारा-पानी न करायें.
▶️ प्रभावित क्षेत्रों से पशु खरीद कर न लायएं.
▶️ यदि किसी पशु की मृत्यु होती है, तो शव को खुले में न फेकें एवं वैज्ञानिक विधि से दफनाएं.
▶️ इसके अलावा रोगी पशु के दूध को बछड़े को न पिलाएं.










