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Dairy Business: देशी गायों से हर दिन 90 लीटर दूध का कर रहे हैं उत्पादन, मिला बड़ा सम्मान

मध्य प्रदेश के एक गौशाला में चारा खाती गायें.

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश सरकार राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने का सपना साकार करने में जुटी है. इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. जिससे ज्यादा से ज्याद किसान डेयरी फार्मिंग की ओर रुख करें. सरकार अच्छा काम करने वाले डेयरी किसानों को सम्मानित करने का भी काम कर रही है. जिससे अन्य लोग भी उत्साहित हों और इस काम से जुड़ें. मध्य प्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने से जहां दूध उत्पादन बढ़ जाएगा, तो वहीं इससे किसानों को भी फायदा होगा. क्योंकि उनके सहयोग से ऐसा होगा और उनकी इनकम भी बढ़ेगी.

वहीं सरकार देशी गायों के संरक्षण और आधुनिक डेयरी फार्मिंग को भी बढ़ावा दे रही है. देशी गायों के संरक्षण और आधुनिक डेयरी फार्मिंगके क्षेत्र में उज्जैन के धीरशान्त त्रिपाठी को सरकार की ओर सम्मानित किया गया. असल में उनकी मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना और डेयरी फार्मिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मानित किया.

पशुओं के स्वास्थ्य पर भी कर रहे हैं काम
धीरशान्त पिछले छह वर्षों से पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़े हैं. उनका जोर देशी गोवंश की नस्लों के संरक्षण, नस्ल सुधार, बेहतर प्रजनन प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन पर है.

उनके फार्म पर वर्तमान में 32 गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 90 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है. धीरशान्त का प्रयास केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है.

वो पशुओं के स्वास्थ्य, संतुलित पोषण, नस्ल सुधार और वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन पर भी काम कर रहे हैं.

उनका उद्दे पारंपरिक पशुपालन को आधुनिक अ वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर इ किसानों और युवाओं के लिए लाभका एवं टिकाऊ व्यवसाय बनाना है.

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधे योजना के तहत उन्होंने डेयरी व्यवसा के विस्तार की दिशा में भी पहल की है.

धीरशान्त का मानना है कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार का बेहतर माध्यम बन सकता है.

देशी गोवंश की आनुवंशिक गुणवत्ता के संरक्षण और वैज्ञानिक पशुपालन पर उनका जोर ज्यादा रहा है.

उनके कार्य को मिला सम्मान उज्जैन जिले के पशुपालकों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है.

इससे देशी गोवंश संरक्षण और आधनिक डेयरी फार्मिंग के प्रति रुचि बढ़ने की उम्मीद है. जिससे उनको फायदा भी होगा.

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