नई दिल्ली. मछली पालन में अब आधुनिक तरीका आजमाया जा रहा है. जिससे कम जोखिम में ज्यादा उत्पादन मिल रहा है और मछली पालकों को मुनाफा मिल रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है की नई तकनीक एकदम जोखिम से खाली है. इसमें भी खतरा आता है और नुकसान होता है. आमतौर पर आधुनिक तकनीक में आरएएस, केज कल्चर, बायोफ्लॉक और रेसवे के जरिए मछली पालन करके मछली पालक अच्छी कमाई कर रहे हैं. मछली पालन के काम में मछली पालकों की अच्छी कमाई हो और उन्हें नुकसान ना हो, इसके लिए सरकार आधुनिक मछली पालन को भी बीमा सुरक्षा दे रही है.
असल में पीएम एमकेएसएसवाई के तहत निर्धारित पात्रता के अनुसार इन नई तकनीक के लिए भी जलीय कृषि बीमा का प्रावधान सरकार की ओर से किया गया है. ताकि नई तकनीक के जरिए मछली पालन करने वालों को कोई नुकसान होता है तो सरकार उसकी भरपाई कर दे. इससे होगा ये कि मछली किसान नुकसान के बावजूद अपने काम को आगे बढ़ा पाएंगे.
कितनी मिलेगी आर्थिक मदद
गौरतलब है कि भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना के तहत आधुनिक मछली पालन और एक्वाकल्चर को वित्तीय सुरक्षा देना के लिए यह योजना शुरू की गई है.
इस योजना के तहत 40 से 50 फीसद तक सब्सिडी या प्रोत्साहन दिया जाता है. यह बीमा बाढ़, चक्रवात, बीमारी और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाता है.
आपको बता दें कि इस तरह से मछली पालन करने पर प्रति हेक्टेयर अधिकतम 25 हजार रुपए और 4 हेक्टेयर पर कुल एक लाख रुपए तक की सहायता मिलती है.
अगर आपका मछली पालन का काम बाढ़, चक्रवात, ज्यादा गर्मी, पानी के प्रदूषण और मछली में होने वाली बीमारियों से प्रभावित होता है तो आपको इसका फायदा मिलेगा.
इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म एनएफडीपी पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा.
तमाम प्रक्रिया पूरी करने के बाद सरकार द्वारा दी जारी मदद डीबीटी के जरिए सीधे खाते में पहुंचेगी.
निष्कर्ष
यदि आप मछली पालक हैं और आधुनिक तकनीक से अच्छी पालन कर रहे हैं तो इस योजना का लाभ आपको मिल सकता है. अधिक जानकारी के लिए स्थानीय मत्स्य से विभाग संपर्क कर सकते है.












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