नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत, 9,467 रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और 4,573 बायोफ्लॉक इकाइयों को मंजूरी दी गई है, जो वर्ष भर मछलीं पालन को सुविधाजनक बनाती हैं. इससे गहन तथा व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य मछली उत्पादन मॉडलों की ओर एक बदलाव की शुरुआत का संकेत उपजा हैं, जो एक्वाकल्चर को पारंपरिक खेती को भौगोलिक क्षेत्रों से परे विस्तारित कर रहे हैं. इस प्रौद्योगिकी के समावेश को PMMSY के तहत 4,120 करोड़ के निवेश द्वारा समर्थन हासिल हुआ है, जो मछली पालन उत्पादन प्रणालियों के आधुनिकीकरण और उन्नत एक्वाकल्चर प्रथाओं के अपनाने में तेजी लाने पर सरकार के जोर को दर्शाता है.
घरेलू उत्पादन को मजबूत करने से परे, RAS और बायोफ्लॉक तकनीकें उच्च-मूल्य समुद्री खाद्य निर्यात में भारत की महत्वाकांक्षाओं का भी समर्थन कर रही हैं. नियंत्रित खेती वातावरण में उत्पादन को सक्षम बनाकर, ये प्रणालियां गुणवत्ता, पहचान और जैव सुरक्षा में स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करती हैं. ये विशेषताएं वैश्विक समुद्री खाद्य बाजारों में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाती हैं. जैसे-जैसे यह क्षेत्र मूल्य संवर्धन और निर्यात-उन्मुख उत्पादन की ओर बढ़ रहा है, वैसे वैसे प्रौद्योगिकी-संचालित एक्वाकल्चर प्रणालियों से भारतीय समुद्री खाद्य की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में देश की स्थिति को सुदृढ़ करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद जागी है.
सजावटी मछली पालन में भी अपनाई जा रही है RAS और बायोफ्लॉक तकनीक
RAS और बायोफ्लॉक तकनीकों की बहुमुखी प्रतिभा देश भर में विशेष एक्वाकल्चर खंडों के विस्तार को भी सक्षम बना रही है.
ये प्रणालियां जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में ट्रॉट जैसी प्रीमियम-मूल्य प्रजातियों की खेती के लिए ठंडे पानी की मत्स्य पालन क्लस्टर में तेजी से अपनाई जा रही हैं.
जबकि लवणीय और खारे पानी के एक्वाकल्चर सिस्टम में निर्यात-उन्मुख झींगा के उत्पादन का भी ये समर्थन कर रही हैं.
सजावटी मछली पालन इकाइयों में इनके प्रयोग से इससे विशिष्ट बाजारों को मजबूती मिल रही है और उद्यमियों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं.
कुल मिलाकर, ये तकनीकें एक्वाकल्चर की पहुंच को व्यापक बना रही हैं और उच्च-मूल्य मत्स्य पालन में विकास के लिए नए रास्ते बना रही हैं.
भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र के आगे का रास्ता प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्थिरता के निरंतर एकीकरण से तय होगा.
जैसे-जैसे देश एक लचीली और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ब्लू इकॉनमी बनाने का प्रयास कर रहा है.
RAS और बायोफ्लॉक प्रणालियों के डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन-सक्षम सेवाओं और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों के साथ परिचालन दक्षता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने की क्षमता बढ़ाते जायेंगे.
उतना ही महत्वपूर्ण झींगा, ट्रॉट, सीबास, तिलापिया, मुर्रल और पंगासियस जैसी उच्च-मूल्य प्रजातियों की ओर एक्वाकल्चर का विविधीकरण भी होगा, जो अधिक मूल्य प्राप्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच को सक्षम बनाएगा.
निरंतर कौशल विकास, उद्योग साझेदारी और एक मज़बूत नीतिगत ढांचे द्वारा समर्थित, ये प्रौद्योगिकी-संचालित उत्पादन प्रणालियां देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने, ग्रामीण रोजगार सृजित हो रहा है.
निष्कर्ष
समुद्री खाद्य निर्यात का विस्तार करने और विकसित भारत के तहत एक टिकाऊ और समृद्ध ब्लू इकॉनमी की दृष्टि को आगे बढ़ाने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती हैं.











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