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Fish Farming: सरकार फिशरीज सेक्टर में टेक्नोलॉजी को दे रही है बढ़ावा, मछली किसानों को दिया जा रहा है लोन

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तालाब में मछली.

नई दिल्ली. सरकार की तरफ से मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कई काम किए जा रहे हैं. ताकि मछली पालक करके किसान अपनी इनकम को बढ़ा सकें. वहीं मुछआरों के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के माध्यम से 100 फीसदी केंद्रीय अंशदान के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत मात्स्यिकी और जलकृषि में मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है वहीं तमाम गतिविधियों के लिए मछुआरों और मछली किसानों को ट्रेनिंग दी जा रही है.

इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में और कौशल विकास कार्यक्रमों में जलकृषि के विविध क्षेत्र शामिल हैं, जैसे गहन मीठे पानी की जलकृषि, खारे पानी की जलकृषि, मेरीकल्चर, सी वीड कल्टीवेशन, ठंडे पानी की जलकृषि, ओर्नामेंटल फिशरीज, फिश प्रोसेसिंग और मारकेटिंग, वाणिज्यिक महत्व की विभिन्न मत्स्य प्रजातियों की प्रजाति-विशिष्ट हैचरी/ब्रीडिंग टेक्नोलॉजी आदि की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है.

5 फीसदी की न्यूतम ब्याज पर मिलता है लोन
मंत्रालय ने साल 2018-19 से 7522.48 करोड़ रुपए के कुल फंड के साथ फिशरीज और (Hydroponics) अवसंरचना विकास निधि/फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इन्फ्रस्ट्रक्चर डेवलेपमेंट फंड (एफआईडीएफ) की शुरुआत की थी. एफआईडीएफ अन्य बातों के साथ-साथ पहचान की गई फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटीज के विकास के लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों, राज्य संस्थाओं और अन्य हितधारकों सहित पात्र संस्थाओं (ईई) को विभिन्न फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटीज के विकास के लिए रियायती दरों पर मदद मुहैया करता है. एफआईडीएफ के अंतर्गत, मत्स्य पालन विभाग अगले स्तर के उद्यमियों (एनएलई) द्वारा रियायती लोन उपलब्ध कराने के लिए प्रति वर्ष 3 फीसदी तक ब्याज अनुदान प्रदान करता है, जिसकी ब्याज दर न्यूनतम 5 फीसदी प्रति वर्ष है.

6 हजार करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई है 136 परियोजना
एफआईडीएफ योजना के तहत, मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने कुल 5801.06 करोड़ रुपए की लागत से कुल 136 परियोजना प्रस्तावों/परियोजनाओं को स्वीकृति दी है. जिसमें विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के लिए ब्याज अनुदान के लिए परियोजना लागत 3858.19 करोड़ रुपए तक सीमित की गई है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एफआईडीएफ के तहत हासिल की गई मदद वाली परियोजनाओं में फिशिंग हार्बर (एफएच), फिश लैंडिंग सेन्टर (एफएलसी), आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, मत्स्य परिवहन सुविधाएं, इन्टीग्रेटेड कोल्ड चेन (समुद्री और अंतर्देशीय क्षेत्र), मॉडर्न फिश मार्केट, ब्रूड बैंक, हैचरी, स्टेट फिश सीड फार्म आधुनिकीकरण, मात्स्यिकी प्रशिक्षण केंद्र (एफटीसी), मत्स्य प्रसंस्करण इकाइयां, फिश फ़ीड मिल/प्लांट, जलाशयों में केजकल्चर, मेरीकल्चर आदि शामिल हैं.

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