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Government Scheme: पोल्ट्री बिजनेस में हैचरी व फीड निर्माण के लिए सरकार दे रही है आर्थिक मदद

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पोल्ट्री फॉर्म में चूजे. live stock animal news

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में पोल्ट्री फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए कई सारी योजनाएं सरकार की ओर से चलाई जा रही हैं. उन्हीं योजनाओं में से एक योजना हैचरी और फीड मिल निर्माण की चल रही है. हैचरी का मतलब पोल्ट्री प्रजनन और फीड मिल का मतलब मुर्गियों के लिए फीड तैयार करने वाली जगह से है. सरकार की योजना उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति और राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत चल रही है. जिसके जरिए भारी सब्सिडी और वित्तीय सहायता यूपी की सरकार पोल्ट्री किसानों को दे रही है. ताकि राज्य में अंडा उत्पादन को बढ़ावा मिल सके और साथ ही चिकन का उत्पादन भी ज्यादा से ज्यादा किया जा सके.

यदि आप भी इस योजना का फायदा लेना चाहते हैं तो यहां हम आपको योजना के बारे में तमाम अहम जानकारी देंगे. जिससे आपको यह फैसला करने में आसानी होगी कि इस योजना का फायदा लेना चाहिए या नहीं.

योजना की हर एक डिटेल यहां जानें
सरकार फीड मिल पर 35 फीसद तक का पूंजीगत अनुदान यानी सब्सिडी दे रही है. वहीं ब्याज में छूट भी 7 फीसद तक देने का वादा किया गया है.

इतना ही नहीं बिजली बिल में 100 परसेंट की छूट भी मिल रही है. इस योजना के तहत स्थापित यूनिटों को शुरुआत में 5 से 10 वर्ष तक बिजली शुल्क से पूरी तरह से छूट मिल रही है.

यदि आप जमीन खरीदते हैं तो जमीन पर लगने वाले स्टांप शुल्क को पूरी तरह से सरकार की ओर से माफ कर दिया जाएगा.

अगर योजना का फायदा लेना है तो बायो सिक्योरिटी के नियम को मनाना होगा. हैचरी को मुख्य आबादी या अन्य कमर्शियल फार्म दूर रखना होगा.

वहीं इसके लिए एक से दो एकड़ भूमि की जरूरत होगी. जहां पर आप यूनिट को लगा पाएंगे.

फीड मिल के लिए कच्चे माल जैसे मक्का, सोयाबीन के परिवहन के लिए मुख्य सड़क से कनेक्टिविटी आसान होनी चाहिए.

यूनिट में पर्याप्त पानी की आपूर्ति भी जरूरी है. बिजली कनेक्शन और जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है.

हैचरी के लिए अंदर स्टोर रूम होनीा चाहिए. अंडा स्टोरेज और चूजा प्रोसेसिंग के लिए रूम व अपशिष्ट के निपटान के लिए सिस्टम लगाना होगा.

फीड मिल संरचना में कच्चे माल का गोदाम, फीड पीसने वाली मशीन, मिक्सर पैलेट, जिसमें फीड को बनाया जाता है और तैयार माल को पैक किया जाता है वो होना चाहिए.

आवेदन करने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और निवास प्रमाण पत्र की जरूरत होगी, खतौनी, रजिस्ट्री के कागजात व एग्रीमेंट दिखाना होगा. किसी अधिकृत चार्टर्ड अकाउंटेंट या तकनीकी विशेषज्ञ द्वारा रिपोर्ट तैयार कराना होगा.

Written by
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