नई दिल्ली. अगर आप अंडा उत्पादन के लिए लेयर मुर्गियों को पालने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए अहम हो सकती है. क्योंकि लेयर मुर्गियों में एक खास चीज करना जरूरी होता है, और वह है मुर्गियों की चोंच को मशीन से काटना. इस पूरी प्रक्रिया को डिबेकिंग कहा जाता है, या बीक ट्रिमिंग भी बहुत से लोग इसे कहते हैं. असल में मुर्गियां झुंड में रहती हैं और कई बार कुछ वजह से लड़कर घायल होने का खतरा रहता है. जबकि ऐसा करने से पोल्ट्री फार्मिंग में नुकसान हो सकता है.
वहीं मुर्गियों की चोंच को मशीन से काट देने के चलते मुर्गियां एक दूसरे से लड़ने के दौरान एक दूसरे को घायल नहीं कर पाती हैं. इससे पोल्ट्री फार्मिंग में नुकसान होने का खतरा कम हो जाता है. आईए जानते हैं कि चोंच काटना क्यों जरूरी है? और इससे क्या-क्या नुकसान हो सकता है, और चोंच काटने से किन नुकसान से बचा जा सकता है.
क्यों नोचती हैं एक-दूसरे को मुर्गियां
पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि मुर्गियां झुंड में रहने की आदत की वजह से कई बार तनाव में या गर्मी की वजह से एक दूसरे को चोंच मारना शुरू कर देती हैं.
इससे दूसरे पक्षी घायल हो जाते हैं और कई बार तो खून भी निकल आता है. जिसके चलते घायल मुर्गियां अन्य मुर्गियां भी नोचने लग जाती हैं.
सबसे बड़ा नुकसान तो यह है कि इससे मृत्यु दर बढ़ने का बहुत ज्यादा खतरा बढ़ जाता है, और ऐसा ना भी हो तब भी घायल मुर्गियों का इलाज करने पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ता है.
वहीं जब नुकीली चोंच की वजह से मुर्गी एक दूसरे के पंख को नोचती हैं तो इससे उनकी स्किन खराब हो जाती है और ग्रोथ भी रुक जाती है.
पोल्ट्री फार्मिंग में सबसे ज्यादा फीड पर खर्च होता है और नुकीली चोंच मुर्गियों के फीड को भी नुकसान पहुंचाती है.
नुकीली चोंच के कारण दाना कई बार मुर्गियों की चोंच से बाहर निकल जाता है. वहीं चोंच को कुंद कर देने से उन्हें दाना खाने में आसानी होती है.
वहीं सभी मुर्गियों की चोंच का आकार एक सामान्य होता है तो सभी एक सामान्य तरीके से दाना खा पाती हैं. जिससे पूरे झुंड का विकास एक जैसा होता है.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि आमतौर पर चोंच से नोचने की समस्या लेयर मुर्गियों में दिखती हैं. जबकि ब्रॉयलर मुर्गे 40 से 50 दिन में बेच दिए जाते हैं तो उनमें ये दिक्कत कम ही दिखती है. इसलिए जरूरी है कि लेयर मुर्गियों की चोंच को कुंद कर दिया जाए.












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