नई दिल्ली. मछली पालन के अलावा यदि मोती पालन (Pearl Farming) भी की जाए तो इससे भी अच्छी कमाई की जा सकती है. अच्छी बात ये है कि इसे एक ही तालाब में एक साथ आसानी के साथ किया जा सकता है. बहुत से मछली पालक मछली पालन वाले तालाब में ही सीप डालकर मोती की खेती करते हैं. इससे न सिर्फ पानी की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि दोहरा मुनाफा भी होता है. बिहार में कई जगहों पर मछली पालक ऐसा कर भी रहे हैं. इसी तरह नवादा जिले के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मोती पालन को अतिरिक्त आय का मुख्य जरिया बना रहे हैं.
कम जगह और सीमित जल संसाधनों में शुरू होने वाले इस व्यवसाय ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता के नये द्वार खोल दिये हैं. तालाबों में सीप का पालन कर कृत्रिम तरीके से मोती तैयार किये जा रहे हैं, जिसकी गुणवत्ता के आधार पर बाजार में भारी मांग और अच्छी कीमत मिल रही है.
किसानों को मिल रही है ट्रेनिंग
▶️ मोती पालन के लिए सीप की उचित देखभाल, पानी की गुणवत्ता और तापमान का वैज्ञानिक प्रबंधन सबसे जरूरी है.
▶️ इसे आसान बनाने के लिए बिहार सरकार का मत्स्य विभाग किसानों को निशुल्क तकनीकी प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सब्सिडी उपलब्ध करा रहा है.
▶️ सरकार द्वारा तैयार मोतियों को बाजार में बेचने की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे किसानों का वित्तीय जोखिम कम हुआ है और वे व्यवस्थित तरीके से इसे एक व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं.
▶️ जिले के अकबरपुर प्रखंड के पचरुखी गांव में रहकर मोती पालन के बिजनेस को किसान संजय कुमार ने शुरू किया. मछली पालन का पहले से अनुभव है.
▶️ विभाग के द्वारा पूरी ट्रेनिग लिया है पहली बार 2000 पीस सीप के साथ मोती पालन का व्यवसाय शुरू किया है.
▶️ उम्मीद है कि अच्छी फसल तैयार होगी और बेहतर मुनाफा भी मिलेगा. उन्होंने कहा कि मैं लोगों से यह कहना चाहता हूं कि अनाज की खेती से बेहतर आमदनी मोती पालन में है.
▶️ मोती पालन का व्यवसाय कर लोग आत्मनिर्भर हो रहे है, इसी से प्रेरित होकर मैने भी यह बिजनेस शुरू किया है.
▶️ मत्स्य विभाग द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है. विभाग की तरफ से सब्सिडी की व्यवस्था भी करायी जाती है. जिले भर के किसानों से कहना चाहूंगा कि वे भी मोती पालन अपनाकर आत्मनिर्भर बने.
▶️ नवादा के जिला मत्स्य पदाधिकारी मनीष कुंटन का कहना है कि बिहार सरकार द्वारा मोती पालन के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है.
▶️ विभाग किसानों को सब्सिडी के साथ निशुल्क ट्रेनिग व अन्य तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है.
निष्कर्ष
मोती पालन के इक्छुक किसान विभाग से संपर्क कर सकते हैं, उन्हें सरकार की सभी योजनाओं का लाभ दिया जायेगा. इससे उन्हें आने वाले समय में अच्छा मुनाफा कमाने का मौका मिलेगा.










