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Cattle: अब इस राज्य में गोवंश को आवारा कहने पर लगी रोक

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. राजस्थान की भाजपा सरकार ने गोवंशों को लेकर 28 अक्टूबर को एक अहम फैसला लिया है. सरकार की ओर से कहा गया है कि अब राज्य में सड़कों पर बेसहारा घूम रहे गोवंशों को आवारा शब्द से संबोधित न किया जाएगा. न ही किसी पत्र आदि में गोवंश को आवारा पशु लिखा जाए. सरकार का तर्क है कि गोवंश के लिए अवारा शब्द का इस्तेमाल करना भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है. इसलिए ऐसो शब्दों से खासकर गायों को तो न बुलाया जाए. इसके संबंध में प्रदेश के सभी डीएम को पत्र जारी कर दिया गया है कि किसी भीे लेटर आदि में अब इस शब्द का इस्तेमाल न किया जाए.

गौरतलब है कि भारत में गायों को पूज्यनीय माना गया है. गायों की लोग पूजा करते हैं और इसे मां तक का दर्जा दिया गया है. गायों को गौमाता भी बुलाया जाता है. जबकि दूसरी ओर बहुत से किसान जब गाय दूध देना बंद कर देती है तो उसे खिला-पिला न पाने की स्थिति में घर के बाहर छोड़ देते हैं. ये गायें इधर—उधर खेतों, बाजारों में और हाईवे आदि पर घूमती नजर आ जाती हैं. इसके चलते बहुत से लोग गोवंशों को आवारा पशु कहके संबोधित करते हैं. इतना नहीं कई बार सरकारी पत्राचार में इस शब्दों का इस्तेमाल होता है. वहीं न्यूज चैनलों और अखबरों में इस शब्द का प्रयोग होता रहा है.

आवारा शब्द को सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ बताया
जबकि दूसरी ओर देशभर में अलग-अलग राज्यों में गोवंशों के लिए शेल्टर तक हैं. जहां उन्हें आश्रय दिया जाता है. सरकारें गोवंशों को सहारा देने के लिए हर महीने लाखों रुपये खर्च करती हैं. राजस्थान में भी गोवंशों के लिए आश्रय केंद्र है. यही वजह है कि सरकार चाहती है कि गोवंशों को अब अवारा शब्द से न बुलाया जाए. इसके लिए सरकार ने एक आदेश जारी किया है. जिसमें कहा गया है कि गौवंश हमारी सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. वर्तमान समय में कुछ गौवंश विभिन्न कारणों से निराश्रित या बेसहारा हो जाते हैं और उन्हें असहाय स्थिति में सड़कों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर देखा जाता है. इन गौवंश के लिए “आवारा” शब्द का उपयोग अनुचित एवं अपमानजनक है, जो हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत है.

आम लोगों और निजी संस्थानों को प्रेरित करने का निर्देश
पत्र में कहा गया है कि स्वतंत्र रूप से इधर से उधर घूमने वाले गौवंश को “आवारा” न कहकर “निराश्रित या बेसहारा गौवंश” के रूप में संबोधित किया जाना चाहिए. यह शब्दावली इन गौवंश के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और करूणा प्रकट करती है और समाज को इनके कल्याण के प्रति उचित दृष्टिकोण रखने में सहायक भी साबित होगी. राजस्थान सरकार की ओर से पत्र में कहा गया है कि सभी राजकीय एवं अनुदानित संस्थाओं द्वारा गौवंश के लिए सम्मान जनक शब्दावली का प्रयोग करें. किसी भी राजकीय आदेश, दिशा-निर्देश, सूचना पत्र, परिपत्र, रिपोर्ट में “आवारा” शब्द के स्थान पर “निराश्रित / बेसहारा गौवंश” का प्रयोग किया जाए. वहीं लोगों से और निजी संस्थाओं को भी इसके लिए प्रेरित किया जाए.

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