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Government Scheme: बिहार के हर गांव में दूध सहकारिता समिति और सुधा दूध बिक्री केंद्र खुलेगा

कम फाइबर के साथ अधिक कंसंट्रेट या अनाज (मक्का) के सेवन से अधिक लैक्टेट और कम वसा दूध होगा.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बिहार सरकार ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. बिहार सरकार ने गांव के किसानों पशुपालकों की इनकम बढ़ाने के लिए कई मजबूत कदम उठाए हैं. सरकार की तरफ से बिहार के गांव में दूध सहकारिता समिति और सुधा दूध बिक्री केंद्र खोलने का फैसला लिया गया है. जिससे बिहार के गांव में रह रहे किसानों और पशुपालकों को सीधा और बड़ा फायदा मिल जाएगा. वहीं बिहार सरकार के इस फैसले से राज्य की डेयरी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की संभावना जताई जा रही है.

पिछले दिनों डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) की प्रस्तावित योजनाओं के संचालन को लेकर एक बैठक में अहम निर्णय लिए गए. इस संबंध में तमाम अधिकारियों को इन योजनाओं को जल्दी जमीन पर उतारने का निर्देश दिया गया है. सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के तमाम गांवों में एक दुग्ध सहकारी समिति बनाई जाए. इन समितियां को जीविका समूह से जोड़ने की योजना पर सरकार काम कर रही है. ताकि ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी भी इसमें सुनिश्चित की जा सके.

महिलाओं के जुड़ने से होगा फायदा
सरकार का मानना है कि जब महिलाएं बड़ी संख्या में इन समितियां से जुड़ेंगी तो वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी.

महिलाओं के समिति से जुड़ने की वजह से उनके परिवार की आर्थिक आय में भी बढ़ोतरी हो जाएगी.

दूध सहकारी समितियां के जरिए किसानों और पशुपालकों अपने दूध का सीधा और उचित दाम मिल पाएगा.

इससे बिचौलियों की भूमिका कम हो जाएगी. वहीं दूध उत्पादक पशुपालकों को इसका सही फायदा मिल सकेगा.

योजना के आधार पंचायत में सुधा दूध बिक्री केंद्र खोलने की बात कही गई है. इससे गांव और कस्बों में रहने वाले लोगों को ताजा, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दूध मिलेगा.

सुधा केंद्र से स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा होगा. उपभोक्ताओं का भरोसा भी सरकारी ब्रांड पर बनेगा.

वहीं पशुओं की नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार हर पंचायत में एक एक एआई वर्कर की तैनाती भी करेगी.

डिजिटल एआई वर्कर की तैनाती से आधुनिक तकनीक के जरिए पशुपालन को बेहतर बनाया जा सकेगा.

इससे भी पशुपालकों की इनकम बढ़ जाएगी. क्योंकि जब पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु मिलेंगे तो ज्यादा उत्पादन भी होाग.

जब पशुपालक ज्यादा से ज्यादा दूध का उत्पादन कर पाएंगे तो इससे लगातार उन्हें फायदा मिलता चला जाएगा.

बैठक में पशु चारा उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया और पौष्टिक चारा उपलब्ध कराकर दूध उत्पादन बढ़ाए जाने पर जोर दिया गया.

Written by
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