नई दिल्ली. जब भी कोई नया काम शुरू किया जाता है तो उस काम को लेकर दिमाग में दो बातें चलती हैं, एक तो ये कि इस काम में फायदा होगा. जबकि साथ-साथ नुकसान का डर भी सताता रहता है. कुछ ऐसा ही मछली पालन के काम के साथ भी है. इस काम में भी नुकसान के डर के चलते बहुत से किसान मछली पालन का काम नहीं करते हैं, जबकि ये इतना बेहतरीन बिजनेस है कि इससे बहुत अच्छी कमाई की जा सकती है. किसान अपनी इनकम को दोगुना कर सकते हैं. हालांकि सरकार इस काम में नुकसान होने पर आर्थिक मदद भी दे रही है.
मछली पालकों को आर्थिक जोखिम से बचाने के लिए अब तालाबों और जलकरों का भी बीमा कराया जा रहा है. ताकि मछली पालन में यदि नुकसान होता है तो सरकार इसकी भरपाई करने के लिए तैयार है. बिहार सरकार की ओर से प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना के तहत सरकारी और निजी तालाबों को जलीय कृषि बीमा योजना से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की गयी है.
किन नुकसान की होगी भरपाई
इससे प्राकृतिक आपदा, बीमारी, जल प्रदूषण और अन्य कारणों से मछलियों की मौत होने पर मत्स्यपालकों को आर्थिक नुकसान से राहत मिलने की उम्मीद है.
मत्स्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले के पांच प्रखंडों में कुल 253 तालाब-पोखर हैं. इनका कुल जलक्षेत्र करीब 230.53 हेक्टेयर है.
इनमें 197 सरकारी और 56 निजी तालाब शामिल हैं. विभाग की योजना इन सभी जलक्षेत्रों को बीमा के दायरे में लाने की है. इसके लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गयी है.
विभागीय जानकारी के अनुसार, सरकारी तालाबों का बंदोबस्त लेने वाले मत्स्यपालकों को बीमा के लिए मत्स्य विभाग में पंजीकरण कराना होगा.
वहीं, निजी तालाबों के मालिकों को भी अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. पंजीकरण के बाद बीमा कंपनी संबंधित मत्स्यपालकों से संपर्क पहल की जा रही है.
इसके लिए मत्स्यपालकों का पंजीकरण कराकर बीमा प्रक्रिया आगे बढ़ाई जायेगी. उद्देश्य मत्स्यपालकों को जोखिम से सुरक्षा देना और मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना है.
बीमा की प्रक्रिया पूरी करेगी. योजना के तहत सामान्य मत्स्यपालकों को बीमा प्रीमियम पर 20 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा.
वहीं, महिला तथा एससी-एसटी वर्ग के लाभुकों को 30 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है. इससे बीमा कराने का आर्थिक बोझ कम होगा और अधिक मत्स्यपालक योजना से जुड़ सकेंगे.
मत्स्यपालक की मृत्यु पर पांच लाख तक का बीमा मत्स्यपालकों को व्यक्तिगत दुर्घटना से सुरक्षा देने के लिए भी पांच लाख रुपये तक के मुफ्त बीमा का प्रावधान है.
पानी में डूबने, जहरीले जीव के काटने, अपराधियों द्वारा हत्या वा अन्य कारणों से मत्स्य पालक की मृत्यु होने की स्थिति में उनके आश्रितों को नियमानुसार सहायता मिल सकती है.












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