नई दिल्ली. बाढ़, चक्रवात, जल प्रदूषण और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण मछली पालन में होने वाले नुकसान से मछली पालकों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में उन्हें राहत देने और मछली व्यवसाय को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए जलीय कृषि बीमा को बढ़ावा दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री मत्स्य समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत जलीय कृषि बोमा के प्रीमियम पर 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन देने का प्रावधान है. वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला मत्स्य पालकों को नियमानुसार 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है. इससे खगड़िया जिले के मछली पालकों को मछली पालन में जोखिम कम करने और अपने निवेश को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है.
बिहार में मत्स्य निदेशालय की ओर से जारी जागरुकता सामग्री के अनुसार, योजना के तहत निर्धारित शतों को पूरा करने वाले सामान्य श्रेणी के पात्र लाभार्थियों को अधिकतम एक लाख रुपए तक सहायता मिल सकती है. वहीं, एससी-एसटी और महिला लाभार्थियों के लिए अधिकतम सहायता राशि 1.10 लाख रुपए तक बताई गई है.
नई तकनीक से मछली पालन करने वालों को भी मिलेगा फायदा
यह फायदा निर्धारित पात्रता, जलक्षेत्र और योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मिलेगा. इसलिए मत्स्य पालकों को आवेदन करने से पहले संबंधित विभाग से पूरी जानकारी प्राप्त करनी होगी.
जलीय कृषि बीमा के दायरे में मलय पालन विभिन प्रणालियों को शामिल करने की का प्रावधान है.
इनमें आरएएस केज कल्चर, बायोप्लॉक, रेसवे और पारंपरिक मत्स्य तालाब जैसी प्रगालियां शामिल हैं.
चार हेक्टेयर तक के जलक्षेत्र के लिए पात्र सामान्य श्रेणी के मत्स्य पालकों को अधिकतम एक लाख रुपए तथा एससी-एसटी और महिला लाभार्थियों को अधिकतम 1.10 लाख रुपए तक सहायता का प्रावधान बताया गया है.
यह सहायता बीमा प्रीमियम पर प्रोत्साहन और योजना के निर्धारित मानकों के अनुसार मिलेगी. इसे प्रत्येक मलय पालक के लिए निश्चित या स्वतः स्वीकृत राशि नहीं माना जा सकता.
खगड़िया जिले में मछली पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार है. उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में सालाना 39.24 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है.
इस उत्पादन के साथ खगड़िया बिहार में आठवें स्थान पर है. जिले में बड़ी संख्या में मत्स्य पालक तालाबों और अन्य जलस्रोतों के माध्यम से मछली पालन करते हैं.
ऐसे में उत्पादन बढ़ाने के साथ प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जोखिमों से होने वाले नुकसान से बचाव भी जरूरी है.
मछली पालन में किसानों को तालाब तैयार करने, मत्स्य बीज डालने, चारा उपलब्ध कराने और पानी की गुणक्ता बनाए रखने पर खर्च करना पड़ता है.
निष्कर्ष
यदि किसी कारण से मछलियों को नुकसान होता है, तो उनकी पूरी पूंजी प्रभावित हो सकती है. ऐसी स्थिति में बीमा सुरक्षा मछली पालकों के लिए मददगार साबित होगी.












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