Home मछली पालन Fisheries: RAS और बायोफ्लॉक के जरिए न सिर्फ घरेलू, बल्कि वैश्विक मांग को भी किया जा रहा है पूरा
मछली पालन

Fisheries: RAS और बायोफ्लॉक के जरिए न सिर्फ घरेलू, बल्कि वैश्विक मांग को भी किया जा रहा है पूरा

केज मछली पालन में मछलियां एक सीमित क्षेत्र में रखी जाती हैं.
केज मछली पालन.

नई दिल्ली. पिछले एक दशक में फिशरीज सेक्टर में खूब ग्रोथ हासिल की है. वहीं अब इस क्षेत्र की उल्लेखनीय वृद्धि दर से साफ दिखाई दे रही है. देश का वार्षिक मछली उत्पादन 2013-14 में 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 198 लाख टन तक पहुंच गया है. यानी दोगुने से अधिक. इस वृद्धि का अधिकांश हिस्सा आंतरिक मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के तेजी से विस्तार से आया है, जिनका उत्पादन इस अवधि में 147 फीसद बढ़कर 61.36 लाख टन से 151.60 लाख टन हो गया. वहीं भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में भी इसी तरह की बढ़ोत्तरी की प्रवृत्ति देखी गई है, जो 2013-14 में 30,213 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 73,890 करोड़ तक पहुँच गई है.

यानी ये भी दोगुने से अधिक हो गई है. गौरतलब है कि यह निरंतर निर्यात वृद्धि जटिल बनते गए वैश्विक व्यापार माहौल और उभरते टैरिफ-संबंधी चुनौतियों के बीच हासिल की गई है. यह स्थिति भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के लचीलेपन, प्रतिस्पर्धात्मकता और बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को रेखांकित करती है. प्रौद्योगिकी का समावेश, विशेषकर एक्वाकल्चर में, इस क्षेत्र के परिवर्तन का मूल आधार रहा है.

मछली उत्पादन व्यवस्था रहती है बेहरतर
इससे और ज्यादा गहन, संसाधन-कुशल और व्यावसायिक रूप से आकर्षक मछली पालन के तरीकों की ओर यह संभव हुआ है.

केज कल्चर और अन्य आधुनिक खेती प्रथाओं के साथ, ये नवाचार एक अधिक उत्पादक, लचीला और भविष्य-तैयार एक्वाकल्चर पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद कर रहे हैं.

जो मछली और मछली उत्पादों की बढ़ती घरेलू और वैश्विक मांग को पूरा करने में सक्षम है. इससे इस काम में जुड़े लोगों को फायदा भी हुआ है.

रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक जलीय खेती प्रथाओं की एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो मछलियों को नियंत्रित वातावरण में पालने की अनुमति देती हैं.

जबकि RAS इष्टतम विकास स्थितियों को बनाए रखने के लिए जल उपचार और पुनःसंचरण प्रणालियों पर निर्भर करता है.

बायोफ्लॉक तकनीक जल गुणवत्ता में सुधार और मछली विकास का समर्थन करने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है.

ये तकनीकें आपस में मिलकर, विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों और उन स्थानों में मछली पालन को संभव बनाकर एक्वाकल्चर की पहुंच का विस्तार कर रही हैं जहाँ पारंपरिक एक्वाकल्चर संभव नहीं हो सकता था.

पानी का 90 से 95 फीसद तक पुनर्चक्रण करके, RAS प्रणाली एक संसाधन-कुशल मछली उत्पादन व्यवस्था का समर्थन करता है.

साथ ही शहरी उपभोग केंद्रों और निर्यात हबों के करीब खेती इकाइयों की स्थापना को सक्षम बनाता है.

निष्कर्ष
इससे इस चक्रीय और टिकाऊ एक्वाकल्चर का अर्थव्यवस्था में योगदान मिलता है. मछली पालन से लोगों को कमाई का बेहतरीन जरिया मिलता है. किसानों की इनकम में इजाफा भी हुआ है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Leave a comment

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Related Articles

The States and UTs have been advised to implement the clusters based approach for development of fisheries and aquaculture. Based on the request received from the Andaman and Nicobar Administration, development of Tuna fisheries cluster in Andaman & Nicobar Islands has been notified under PMMSY.
मछली पालन

Fisheries: गावों में किसानों की इनकम को बढ़ा रहा है मछली पालन का काम, 2015 से लगातार हुई है ग्रोथ

नई दिल्ली. भारत का मछली पालन क्षेत्र अब केवल उत्पादन-केंद्रित गतिविधि तक...

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fish Farming Tips: सर्दियों में मछली पालन में बरतें ये सावधानियां, तभी मिलेगा बेहतर रिजल्ट

नई दिल्ली. सर्दियां मछली पालन के लिए भी खतरनाक है. मछली पालन...

मछली पालन

Fish Outlet: पटना में फिश आउटलेट खुलते ही लगी भीड़, कुछ ही घंटों में बिकी 150 किलो मछली

नई दिल्ली. सरकार ने बिहार के कई जिलों में ‘फ्रेश कैच’ खोला...