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Egg Production Drop: तनाव, कम रोशनी और पेट के कीड़े से मुर्गियां नहीं करती हैं अंडा उत्पादन

Poultry animals including chicken, duck, turkey and quail on a farm
Different poultry animals raised for eggs and meat production.

नई दिल्ली. जब आप अंडों के उत्पादन और इससे कमाई के लिए लेयर मुर्गियों को पालते हैं तो कई बार ये देखने को मिलता है कि मुर्गियों ने अचानक से अंडा उत्पादन कम कर दिया है. पोल्ट्री एक्सपर्ट की ओर से इसकी कई वजह गिनाई जाती है. कई ऐसा होता है कि मुर्गियों के शरीर में कैल्शियम और जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है. जबकि रोशनी (लाइटिंग) की दैनिक अवधि कम होने से और तनाव (Stress) से भी ऐसा होता है. जब​कि अचानक मौसम का बदलना भी नुकसानदेह है. वहीं बिना वजह समझे सीधे एंटीबायोटिक्स या अन्य दवाइयों के देने से भी मुर्गियों का लिवर डैमेज हो जाता है और अंडे का उत्पादन और तेजी से गिरता है.

रोशनी की बात करें तो, असल में मुर्गियों की आंखों से प्रकाश उनके मस्तिष्क (पिट्यूटरी ग्लैंड) तक पहुंचता है, जो अंडा निर्माण के हार्मोन्स को सक्रिय करता है. केवल 10 से 12 घंटे की प्राकृतिक रोशनी मिलने पर मुर्गियां पूरी क्षमता से अंडे नहीं दे पाती हैं.

कैश्यिम की न होने दें कमी
इसलिए मुर्गियों को प्रतिदिन कुल 14 से 16 घंटे रोशनी मिलना अनिवार्य है. दिन ढलने के बाद शाम को 2 से 4 घंटे बल्ब जलाकर यह समय पूरा करें.

अंडे का छिलका लगभग 85 फीसद कैल्शियम कार्बोनेट से बना होता है. वहीं शरीर में कैल्शियम घटने पर मुर्गियां पतले या बिना छिलके वाले अंडे देने लगती हैं या अंडा देना बंद कर देती हैं.

ऐसे में पशु चिकित्सक के परामर्श से अच्छी गुणवत्ता का लिक्विड कैल्शियम हफ्ते में कम से कम 3 दिन पीने के पानी में मिलाकर देना चाहिए.

मुर्गियों को समय-समय पर सहजन के पत्ते खिलाएं. इसमें प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक कैल्शियम और विटामिन्स होते हैं, जिससे दाने की लागत भी घटती है और मुर्गियों का स्वास्थ्य सुधरता है.

कई बार शेड की क्षमता के अनुसार मुर्गियों न रखने से और भीड़ बढ़ जाने से मुर्गियां तनाव में आ जाती हैं.

इसलिए शेड को शोरगुल वाली जगहों से दूर रखें और कुत्तों, बिल्लियों या अन्य शिकारी जानवरों से पूरी तरह सुरक्षित रखें.

इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एंटी-स्ट्रेस दवा दें.

पेट में कीड़े होने पर दाने का सारा पोषण कीड़े खा जाते हैं और मुर्गियों के शरीर को नहीं लगता है. समय-समय पर वेटनरी डॉक्टर की सलाह से डीवॉर्मिंग कराएं.

वहीं मुर्गियों को नियमित अंतराल पर नीम के पत्ते खिलाने से भी पेट के कीड़े प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाते हैं. इससे अंडा उत्पादन प्रभावित नहीं होता है.

निष्कर्ष
मुर्गियों का अंडा उत्पादन क्यों प्रभावित होता है. इस बात की जानकारी आपको हो ही गई होगी. इसलिए जरूरी है कि ऐसा होने से रोकें और खुद को नुकसान से बचाएं.

Written by
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