नई दिल्ली. सर्दियों के मौसम में चूजों की होने वाली मौतों (Mortality) के एक नहीं 5 प्रमुख कारण होते हैं. हालांकि गलतियों और उनके सटीक समाधानों के बारे में जानकर आप चूजों को मरने से बचा सकते हैं. एक तो अक्सर ब्रूडर का गलत तापमान यानि तापमान के असंतुलन के कारण ऐसा होता है. क्योंकि अंदाजे से केवल 1-2 बल्ब जलाकर छोड़ देना या जरूरत से ज्यादा गर्मी दे देना खतरनाक है. तापमान कम होने पर चूजे ठंड से ठिठुर कर एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर दब जाते हैं. वहीं कई बार तापमान बहुत अधिक होने पर चूजे डिहाइड्रेशन का शिकार होकर भा मर जाते हैं.
एक्सपर्ट कहते हैं कि ब्रूडिंग एरिया में अंदाजे के बजाय डिजिटल थर्मामीटर लगाएं ताकि सटीक तापमान (पहले हफ्ते 32°C–33°C) की लगातार निगरानी हो सके.
इन गलतियों से भी बचें
पर्दा न लगाने से रात की ठंडी हवा सीधे चूजों पर लगती है, जिससे उन्हें तुरंत सर्दी, जुकाम और CRD (सांस की बीमारी) हो जाती है.
दूसरी तरफ, पूरे शेड को ऊपर से नीचे तक प्लास्टिक/तिरपाल से पूरी तरह सील (पैक) कर देने से अंदर की अमोनिया गैस बाहर नहीं निकल पाती और दम घुटने से चूजे मरते हैं.
इसलिए पर्दे नीचे से बंद रखें लेकिन ऊपरी भाग में वेंटिलेशन (हवा का निकास) खुला रखें ताकि ताजी हवा आती रहे और जहरीली गैस बाहर निकलती रहे.
ड्रिंकर लीक होने या चूजों की बीट से लकड़ी का बुरादा या धान की भूसी गीली हो जाती है. गीले बिछावन से निकलने वाली तीखी अमोनिया गैस से चूजों की आंखें खराब होती है. पैर कमजोर (लंगड़ापन) पड़ते हैं और सांस की बीमारी (CRD) फैलती है.
इसलिए बिछावन को कभी गीला न रहने दें. रोजाना सुबह-शाम रैकिंग (उलट-पलट) करें और गीली जगह का बुरादा तुरंत निकालकर नया सूखा बुरादा डालें.
वहीं छोटे चूजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बहुत कमजोर होती है. सर्दियों में सीधे नलों या टंकियों का बर्फीला ठंडा पानी पिलाने से चूजे तुरंत बीमार पड़ते हैं और फेफड़ों का संक्रमण हो जाता है.
इससे बचाव के लिए ठंड के दिनों में चूजों को हमेशा हल्का गुनगुना और ताजा पानी ही पीने के लिए दें.
ठंड में शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए चूजों को उच्च ऊर्जा और पोषण की आवश्यकता होती है.
लागत बचाने के लिए सीलनयुक्त, फफूंद (Fungus/Toxin) लगा या एक्सपायरी दाना खिलाने से वे तुरंत टॉक्सिक इन्फेक्शन के शिकार हो जाते हैं.
इसलिए शुरुआती 10-14 दिनों तक केवल उच्च गुणवत्ता वाला, सूखा और ताजा प्री-स्टार्टर दाना ही खिलाएं.
निष्कर्ष
पोल्ट्री फार्मिंग बेहद ही ध्यान से किया जाने वाला काम है. इसमें जरा सी भी लापरवाही बड़ा नुकसान लाती है. इसलिए सावधानी के साथ काम करें.












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