Home पशुपालन Animal Husbandry: यूपी के 20 जिलों में पशुओं पर मंडरा रहा है लंपी स्किन डिजीज का खतरा
पशुपालन

Animal Husbandry: यूपी के 20 जिलों में पशुओं पर मंडरा रहा है लंपी स्किन डिजीज का खतरा

इस तरह से पशु के शरीर पर निकल आती हैं गाठें.

नई दिल्ली. लंपी स्किन डिजीज (LSD) पशुओं के लिए बेहद ही खतरनाक बीमारी है. इसमें पशुओं के उत्पादन पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही गंभीर स्थिति होने पर पशु की मौत भी हो जाती है. इसलिए इस बीमारी से अपने पशुओं को बचाने की जरूरत है. लंपी स्किन डिजीज को लेकर यूपी सरकार भी सतर्कता बरत रही है. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग की रोग नियंत्रण निदेशक डॉ. संगीता तिवारी द्वारा लंपी स्किन डिजीज (LSD) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गई हैं, ताकि पशुओं को इस बीमारी से बचाया जा सके.

उन्होंने कहा कि लंपी स्किन डिजीज एक विषाणु जनित (वायरल) बीमारी है, जिससे उत्तर प्रदेश के लगभग 20 जनपद प्रभावित हुए हैं. यह बीमारी मनुष्यों में नहीं फैलती है. यानि ये जूनोटिक बीमारी नहीं है. हालां​कि पशुओं पर बहुत ज्यादा असर दिखाई देता है.

गांठों से होती है ज्यादा तकलीफ
इस बीमारी में पशुओं के शरीर पर बड़े-बड़े नोड्यूल्स (गांठें) बन जाते हैं, शरीर में सूजन आ जाती है.

उन्होंने बताया कि इस बीमारी में दूध उत्पादन व उत्पादकता में भारी कमी आ जाती है. इससे पशुपालक को नुकसान होता है.

इस बीमारी में भले ही पशु की मौत न हो लेकिन पशु को अत्यधिक कष्ट और दर्द होता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचता है.

क्योंकि पशुओं से बेहतर उत्पादन लेने के लिए जरूरी है कि वो पूरी तरह से हैल्दी रहे और उसको जरा भी तनाव न हो.

​रोकथाम व टीकाकरण की बात करें तो बरसात से पहले समय पर टीकाकरण करा लेने से पशु इस बीमारी से सुरक्षित रहते हैं.

डॉ. संगीता ने लोगों से अपील की है कि जब भी टीकाकरण टीम आए, पशुपालकों को अपने पशुओं का टीका अवश्य लगवाना चाहिए.

वहीं बीमारी होने पर खुद से कोई दवा नहीं देना चाहिए. ये और ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है.

इसके लिए निकटतम पशु चिकित्सालय जाकर किसी कुशल पशु चिकित्सक के परामर्श से ही निर्धारित दवाओं से उपचार कराएं ताकि साइड इफेक्ट्स से बचा जा सके.

यहां ये भी जान लें कि इस बीमारी में पशुओं का शारीरिक तापमान काफी बढ़ जाता है. यानि पशु के शरीर का तापमान तकरीबन (104-105 डिग्री फॉरेनहाईट) हो जाता है.

शरीर के अधिकतर भागों में जो मोटे-मोटे उभरे हुये चकत्ते हो जाते हैं. पशु उसे खुजलाकर घाव कर लेते हैं. इससे चकत्तों में जीवाणुओं का संक्रमण बढ़ जाता है.

निष्कर्ष
लंपी स्किन डिजीज से पशु को बचाने के लिए सबसे जरूरी ये है कि पशु को समय पर वैक्सीन लगाइए जाए. ताकि पशु को इस बीमारी से पूरी तरह से बचाया जा सके.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

पशुपालनमछली पालन

Kisan Mela: किसान मेले में पशुपालन और मछली पालन के फायदे गिनाए

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के...

पशुपालन

Animal Husbandry: पशुधन बीमा पोर्टल की हुई शुरुआत, अब पशुपालकों के लिए मुआवजा पाना होगा आसान

नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव...