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Animal Disease: इस नई तकनीक से गाय-भैंस में थनैला की पहचान होगी आसान, जल्द हो सकेगा इलाज

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प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. एनिमल एक्सपर्ट अक्सर ये कहते हैं कि पशुओं को बीमारी से बचाना बेहद ही जरूरी होता है. अगर पशुओं को बीमारी से न बचाया जाए तो न सिर्फ दूध उत्पादन ​में गिरावट होती है, बल्कि पशुओं की सेहत भी खराब हो जाती है. इसलिए बेहद ही जरूरी है कि पशुओं की होने वाली तमाम बीमारियों से हिफाजत की जाए. आपको बता दें कि पशुओं में थनैला (मस्ताइटिस) एक गंभीर बीमारी है. जिसको लेकर पशुपालक परेशान रहते हैं. इस बीमारी को लेकर लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) को एक बड़ी कामयाबी मिली है.

दरअसल, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) को पशुओं में थनैला (मस्ताइटिस) की जांच के लिए एक नए जैव रासायनिक तकनीक के लिए भारत सरकार से पेटेंट हासिल कर लिया है. दूध में अल्फा-1 एसिड ग्लाइकोप्रोटीन की सांद्रता का अनुमान लगाने के लिए जैव रासायनिक परख शीर्षक इस तकनीक को पेटेंट संख्या 566866 प्रदान की गई है.

खास रसायन का होता है इस्तेमाल
इस संबंध में लुवास के कुलपति एवं अनुसंधान निदेशक डॉ. नरेश जिंदल ने बताया कि यह तकनीक गाय और भैंसों में थनैला की पहचान के लिए बेहद ही उपयोगी साबित होगी. थनैला एक आर्थिक दृष्टि से बेहद ही गंभीर बीमारी है और इस नई विधि से उसका सटीक निदान आसान हो सकेगा. परीक्षण में दूध के नमूने को एक खास रसायन के साथ मिलाकर स्पेक्ट्रोफोटोमीटर के माध्यम से अल्फा-1 एसिड ग्लाइकोप्रोटीन की मात्रा मापी जाती है, जो बीमारी की उपस्थिति में बढ़ जाती है. बता दें कि ये रिसर्च कार्य स्नातकोत्तर छात्र डॉ. अनिरबन गुहा द्वारा विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. संदीप गेरा के मार्गदर्शन में पशु चिकित्सा फिजियोलॉजी एवं जैव रसायन विभाग में पूर्ण हुआ.

जल्दी हैल्दी हो जाएंगे पशु
डॉ. जिंदल ने दोनों वैज्ञानिकों को इस उल्लेखनीय इनोवेशन के लिए बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि लुवास की अनुसंधान गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाती है. वहीं डॉ. संदीप गेरा ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह परीक्षण तकनीक थनैला बीमारी के जल्द से जल्द इलाज को आसान और सुलभ बनाएगी. उन्होंने कहा कि इससे पशुपालकों को फायदा होगा. उनके पशु जब जल्दी से हैल्दी हो जाएंगे तो फिर नुकसान भी कम होगा. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एसएस ढाका, डॉ. गुलशन नारंग, डॉ. राजेश खुराना, डॉ. मनोज रोज और डॉ. नरेश कक्कड़ भी उपस्थित रहे.

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