नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार गो संरक्षण अभियान से अब नई पीढ़ी, खासकर जेन जी को भी जोड़ने की तैयारी कर रही है. गांव-गांव अभियान चलाकर युवाओं को गोवंश के संरक्षण, गो सेवा और इसके सामाजिक-आर्थिक महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा. इसके लिए करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे. पहले मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित होंगे और फिर उनके माध्यम से अन्य लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसमें गो संरक्षण और गो सेवा में पहले से रुचि रखने वाले लोगों को इसमें वरीयता दी जाएगी. इसके साथ ही योगी सरकार गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का मॉडल विकसित करने पर काम कर रही है.
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है. सरकार का प्रयास है कि गोवंश का संरक्षण केवल गो आश्रय स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे रोजगार और ग्रामीण समृद्धि के नए अवसर भी पैदा हों. इसी सोच के तहत गोशालाओं को गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है.
बच्चों और युवाओं तक पहुंचेगा गो संरक्षण का संदेश
उन्होंने बताया कि नई पहल में सबसे ज्यादा जोर बच्चों और युवाओं को गो संरक्षण से जोड़ने पर रहेगा.
गांवों में अभियान चलाकर उन्हें देसी गोवंश, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय के महत्व की जानकारी दी जाएगी.
इस अभियान का उद्देश्य यह है कि नई पीढ़ी गो संरक्षण के पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं को भी समझें.
अभियान को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे. ये मास्टर ट्रेनर आगे अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे.
इस व्यवस्था के जरिए गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी है. गो संरक्षण में रुचि रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी.
यूपी में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है.
प्रदेश में साढ़े सात हजार से अधिक गो आश्रय स्थल विकसित किए गए हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं.
किसानों की फसलों को निराश्रित पशुओं से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ गोवंश को सुरक्षित आश्रय देना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है.
योगी सरकार ने गोवंश के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में भी वृद्धि की है.
प्रति गोवंश प्रतिदिन मिलने वाली राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया है.
वहीं अधिकांश गो आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था भी की गई है.










