Home पशुपालन FMD: जून के महीने में देशभर के 65 जिलों में एमएफडी बीमारी फैलने का खतरा, इस तरह पशुओं को बचाएं
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FMD: जून के महीने में देशभर के 65 जिलों में एमएफडी बीमारी फैलने का खतरा, इस तरह पशुओं को बचाएं

goat and sheep difference
भेड़ और बकरी की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. खुरपका, मुंहपका एफएमडी बीमारी आमतौर पर भेड़-बकरी और गाय-भैंस में होती है. इसे खत्म करने के लिए करने के लिए देशभर में टीकाकरण अभियान बड़े जोर-शोर से चल रहा है और देश में हर साल करीब 50 करोड़ पशुओं को एफएमडी की वैक्सीन लगाई जाती है ताकि इस रोग से पशुओं को निजात दिलाई जा सके. दरअसल, सरकार इस बीमारी को इस वजह से भी खत्म करना चाहती है कि इसके चलते देश में डेयरी कारोबार और मीट कारोबार को वो गति नहीं मिल पा रही है जिसकी जरूरत है. इसलिए इस बीमारी को जड़ से खत्म करना बेहद जरूरी है. जबकि बीमारी का एकमात्र इलाज टीकाकरण ही है.

यहां बताते चलें कि एफएमडी को लेकर पशुपालन को लेकर काम करने वाली निविदा संस्थान की ओर से एडवाइजरी जारी गई है. संस्था ने एडवाइजरी में कहा है कि एफएमडी बीमारी आने वाले जून माह में देश के 65 जिलों को अपनी चपेट में ले सकती है. एफएमडी बीमारी की वजह से अंडमान निकोबार के दो जिले, अरुणाचल प्रदेश के 2 जिले, असम का एक जिला, हिमाचल प्रदेश का 2 जिला, झारखंड का 17 जिला, कर्नाटक का 12 जिला, केरल का 14 जिला, मेघालय का 4 जिला, उड़ीसा का दो जिला, राजस्थान का दो जिला, त्रिपुरा का चार जिला, उत्तराखंड का एक जिला और वेस्ट बंगाल का दो जिला चपेट में आ सकता है.

इन शहरों में है ज्यादा खतरा
शहरों के आंकड़ों की बात की जाए तो झारखंड के बोकारो, देवघर, धनबाद, दुमका, गुमिया, हजारीबाग, कोडरमा, लोहरदगा, पाकुर, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, रांची, साहिबगंज, सिमडेगा, खूंटी और रामगढ़ के पशु खतरे में हैं. वहीं कनाटक के बेंगलुरु ग्रामीण, बैंगलुरु, चामराजनगर, चिकमंगलूर, चित्रदुर्ग, हसन, हावेरी, कोडागू, मैसूर, तुमकुर, उत्तर कन्नड़ और रामानगर में पशुओं पर खतरा मंडरा रहा है. वहीं केरल के अलपुझा, एर्नाकुलम, इडुक्की, कन्नूर, कासरगोड, कोल्लम, कोट्टायम, कोझिकोड, मलप्पुरम, पलक्कड़, पथानामथिट्टा, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर और वायनाड में पशु हाईरिस्क पर है.

बीमारी के लक्षण क्या हैं
एनिमल एक्सपर्ट निवेश शर्मा कहते हैं कि एफएमडी पीड़ित पशु जैसे गाय-भैंस, भेड़-बकरी के लक्षण यह है कि उन्हें 104 से 106 एफ तक तेज बुखार होता है. भूख कम हो जाती है. पशु स्वस्थ रहने लगते हैं. मुंह से बहुत सारी लार टपकने लगता है. मुंह में फफोले हो जाते हैं. खासतौर पर जीभ और मसूड़े पर फफोले बहुत ज्यादा हो जाते हैं. पशुओं के पैर में खुर के बीच घाव हो जाता है. जो अलसर होता है. जबकि ग्रामीण पशु का गर्भपात हो जाता है. थन में सूजन और पशुओं में बांझपन की बीमारी हो जाती है.

कैसै फैलती है बीमारी
एक्सपर्ट कहते हैं कि पशुओं में दूषित चारा, दूषित पानी से एफएमडी रोग जल्दी फैलता है. बारिश के दौरान खासतौर पशु खुले में चरने के लिए दूसरी चारा पानी खा पी लेते हैं. खुले में कुछ पड़ी सड़ी गली चीज भी खा लेते हैं. इसके चलते फार्म पर आए नए पशुओं को भी ये बीमारी लग जाती है. एफएमडी की बीमारी पीड़ित पशुओं के साथ रहने से भी हो जाती है.

किस तरह पशुओं को बचाएं
पशुओं में एफएमडी की रोकथाम करना बहुत आसान है. इसमें कोई पैसा नहीं खर्च होता है. सबसे पहले तो अपने पशु का रजिस्ट्रेशन करें और उसके बाद कान में ईयर टैग डलवाएं. किसी पशु स्वास्थ्यप्ले केंद्र पर साल में दो बार फ्री लगने वाले एफएमडी के तक को लगवाएं. टीके लगवाने के बाद इस बात का खासकर ख्याल रखें कि लगभग 10 से 15 दिन में पशु प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है. इसलिए तब तक पशु का खास ख्याल रखें. बरसात के दौरान पशु को बैठने और खड़े होने की जगह की साफ सफाई रखें.

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