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इस बीमारी की वजह से यूरोपीय देश नहीं लेते मीट और डेयरी प्रोडेक्ट, इस अभियान के पूरा होते ही मांगेंगे प्रोडेक्ट

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प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. भारत के बफैलो मीट और डेयरी उत्पाद यूरोप को हमेशा से ही पसंद आए हैं लेकिन जांच संबंधी तकनीक में मामला फंस जाने के कारण भारत के ये प्रोडक्ट यूरोप के बाजार तक नहीं पहुंच पाते जबकि एक्पोर्टर अपने इन प्रोडक्टर को वहां तक ले जाने के लिए उत्साहित रहते हैं. मगर, एनीमल एक्सपर्ट की मानें तो गाय-भैंस और भेड़-बकरी में एफएमडी यानी खुरपका-मुंहपका बीमारी पाई जाती है. एफएमडी को पशुओं में बेहद खतरनाक बीमारी माना जाता है. यही वजह है कि यूरोपीय देश भारत से बफैलो मीट और डेयरी प्रोडक्ट खरीदने से बचते हैं. वैज्ञानिकों की मानें तो एफएमडी का समूल खात्मे के लिए लंबे समय से टीकाकरण अभियान चल रहा है. अब इसमें और भी तेजी आई है. देश के कई प्रदेशों में तो तीसरा चरण पूरा भी हो चुका और अब चौथा चरण का टीकाकरण शुरू हो गया है. इसी तेजी से अभियान चलता रहा तो जल्द ही एफएमडी पर काबू पा लिया जाएगा. इस बीमारी के खत्म होते ही यूरो​पीय देशों में मीट और डेयरी प्रोडेक्ट का एक्स्पोर्ट शुरू हो जाएगा.

भारत के बफैलो मीट और डेयरी उत्पादों की यूरोपीय देशों में हमेशा से मांग रही है. लेकिन जांच संबंधी तकनीक में मामला फंस जाने के कारण भारत के ये प्रोडक्ट यूरोप के बाजार तक नहीं पहुंच पाते. मगर, नवंबर 2023 में एक बैठक की रिपोर्ट ने एक्सपोटर्स की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है. तेजी से चर्चा चल रही है कि यूरोप के बाजार में बफैलो मीट और डेयरी प्रोडक्ट जा सकते हैं. अब एक्सपोर्टर भी इसी चर्चा के साथ अपने स्तर से तैयारियों में जुट गए हैं. आपको बता दें कि भारत दुग्ध उत्पादन में दुनिया में पहला स्थान रखता है जबकि मीट प्रोडक्शन में आठवां. भारत में 2022-23 में 9.77 मिलियन टन मीट का उत्पादन हुआ था. हर साल इसमें पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी भी हो रही है.

ये वजह है मीट के यूरोप न जाने की
एनीमल एक्सपर्ट की मानें तो गाय-भैंस और भेड़-बकरी में एफएमडी यानी खुरपका-मुंहपका बीमारी पाई जाती है. इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए भारत में वर्ष 2020-21 से एफएमडी वैक्सीन के नाम से अभियान चलाया जा रहा है. एफएमडी को पशुओं में बेहद खतरनाक बीमारी माना जाता है. यही वजह है कि यूरोपीय देश भारत से बफैलो मीट और डेयरी प्रोडक्ट खरीदने से बचते हैं.

इस अभियान के पूरा होते ही शुरू हो सकता है निर्यात
वैज्ञानिकों की मानें तो एफएमडी का समूल खात्मे के लिए लंबे समय से टीकाकरण अभियान चल रहा है. अब इसमें और भी तेजी आई है. यही वजह है कि एफएमडी टीकाकरण अभियान अब धीरे-धीरे कामयाबी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. अब हालात ये है कि देश के कई प्रदेशों में तो तीसरा चरण पूरा भी हो चुका और अब चौथा चरण का टीकाकरण शुरू हो गया है. इसी तेजी से अभियान चलता रहा तो जल्द ही एफएमडी पर काबू पा लिया जाएगा.

इन 12 प्रदेशों में लग चुकी है 12 करोड़ वैक्सीन
एफएमडी को जड़ से खत्म करने के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा है. देश के 12 राज्यों में तीसरा चरण पूरा भी हो चुका जबकि 17 प्रदेशों में अभी तीसरा चरण चल रहा है. मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार तीसरे चरण के टीकाकरण में 12 करोड़ पशुओं को टीका लगाया जा चुका है. छह राज्यों में चौथे चरण का टीकाकरण शुरू हो चुका है. चौथे चरण के तहत इन छह राज्यों में 4.22 करोड़ वैक्सीन भेजी जा चुकी है. बता दें कि तीसरे चरण में शामिल ज्यादातर राज्य बड़ी मात्रा में दूध का उत्पादन करते हैं.

इन राज्यों में हो चुका तीसरा चरण
महाराष्ट्र्, दिल्ली, आंध्रा प्रदेश, कर्नाटक, चंडीगढ़, तमिलनाडू, पुडुचेरी, गोवा, लद्दाख, ओडिशा, केरल और लक्ष्यदीव में एफएमडी टीकाकरण का तीसरा चरण पूरा हो चुका है.

इन प्रदेशों में चल रहा तीसरा चरण
एफएमडी टीकाकरण का तीसरा चरण मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अंडमान-निकोबार, सिक्किम, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, असम और झारखंड में चल रहा है और इसके शीघ्र पूरा होने की संभावना जताई जा रही है.

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