Home मछली पालन Fish Farming: बाजार में मछली की गिरती कीमतों के बीच सरकार ने दी मछली पालकों को राहत
मछली पालन

Fish Farming: बाजार में मछली की गिरती कीमतों के बीच सरकार ने दी मछली पालकों को राहत

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश सरकार ने जानकारी दी है कि ई-फिश प्लेटफॉर्म के आंकड़ों और राज्य सरकार के डेटाबेस के अनुसार, राज्य में लगभग 2.16 लाख मत्स्यपालक लगभग 5.79 लाख एकड़ क्षेत्र में मीठे और खारे पानी में मत्स्यपालन में लगे हुए हैं. आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में मछली पालकों को बाजार में कीमतों में गिरावट और मछली के चारे (फीड) की कीमत में बढ़ोतरी होने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. यही वजह है कि आंध्र प्रदेश सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए चारे की लागत कम करने सहित कई उपाय किए हैं.

इस संबंध में, फीड निर्माताओं ने झींगा चारे की कीमत चार रुपये प्रति किलोग्राम कम करने पर सहमति जताई है. आंध्र प्रदेश सरकार ने बताया कि राज्य मत्स्य विभाग, मछली और झींगा पालकों की समस्याओं के समाधान के लिए जलीय कृषि संघों, मूल्यवर्धित उद्यमों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है. राज्य सरकार ने यह भी कहा कि राज्यव्यापी फसल अवकाश आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने भी दी राहत
भारत सरकार का मत्स्य विभाग, आंध्र प्रदेश सरकार के समन्वय से, राज्य में मत्स्यपालकों के हितों की रक्षा के लिए विभिन्न उपाय कर रहा है.

राज्य सरकार की जानकारी के अनुसार, पंजीकृत मछली पालकों को एक रुपये पचास पैसे प्रति यूनिट की रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है.

इसके अलावा, फ़ीड निर्माताओं से परामर्श के माध्यम से, राज्य में झींगा फ़ीड की कीमत में चार रुपये प्रति किलोग्राम की कटौती की गई है.

भारत सरकार ने झींगा पालन की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार के महत्व को समझते हुए मत्स्यपालन की लागत को कम करने के लिए कई नीतिगत उपाय किए हैं.

केंद्रीय बजट 2024-25 और 2025-26 में, 16 प्रमुख मत्स्यपालन इनपुट पर सीमा शुल्क की दरें 30 प्रतिशत से घटाकर 0-5 प्रतिशत तक कर दी गईं, जिससे आवश्यक इनपुट की लागत कम हो गई.

इसके अलावा, सितंबर 2025 में, भारत सरकार ने कृषि उपकरण, फ़ीड सामग्री, जल संशोधक, मछली पकड़ने के जाल और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य उत्पादों सहित 20 से अधिक मत्स्य पालन और जलीय कृषि से संबंधित उत्पादों पर जीएसटी दरों को 12-18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने को मंजूरी दी।

इन उपायों से उत्पादन लागत में कमी आने, आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के किसानों की लाभप्रदता में सुधार होने और देश के मत्स्य पालन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है.

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार और राज्य सरकारें फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और मछली पालकों की आय बढ़ाने के लिए मूल्यवर्धित उद्यमों को बढ़ावा दे रही हैं.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

The Department of Fisheries organized the Startup Conclave 2.0 to promote innovation in the fisheries sector.
मछली पालन

Fisheries: फिशरीज सेक्टर तीन करोड़ मछुआरों और मछली किसानों की इनकम का बना मजबूत पिलर

नई दिल्ली. मत्स्य पालन और जलीय खेती का क्षेत्र भारत की आर्थिक...

मछली पालन

Shrimp Farming: खारे पानी में झींगा पालन की बारीकी समझने अफसरों की टीम पहुंची हरियाणा के सिरसा

नई दिल्ली. फिशरीज सेक्टर में संभावनाएं बहुत हैं. इससे किसानों की इनकम...

Fisheries, Fish Rate, Government of India, Live Stock Animal News, Boat
मछली पालन

Fish: फिशिंग हार्बर फिश लैंडिंग सेंटर के बनने से मछली के रख-रखाव और नावों को खड़ा करने की बढ़ी सुविधा

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत पुडुचेरी स्थायी और...