नई दिल्ली. मछली पालन में अब नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. जिससे मछली पालन को बढ़ावा दिया जा सके. इसी कड़ी में रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक जलीय खेती प्रथाओं की एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो मछलियों को नियंत्रित वातावरण में पालने की अनुमति देती हैं. जबकि RAS तकनीक विकास स्थितियों को बनाए रखने के लिए जल उपचार और पुनःसंचरण प्रणालियों पर निर्भर करता है. वहीं बायोफ्लॉक तकनीक जल गुणवत्ता में सुधार और मछली विकास का समर्थन करने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है.
ये तकनीकें आपस में मिलकर, विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों और उन स्थानों में मछली पालन को संभव बनाकर एक्वाकल्चर की पहुंच का विस्तार कर रही हैं जहाँ पारंपरिक एक्वाकल्चर संभव नहीं हो सकता था. पानी का 90–95 परसेंट तक पुनर्चक्रण करके, RAS प्रणाली एक संसाधन-कुशल मछली उत्पादन व्यवस्था का समर्थन करता है.
टिकाऊ एक्वाकल्चर को मिल रहा बढ़ावा
इससे शहरी उपभोग केंद्रों और निर्यात हबों के करीब खेती इकाइयों की स्थापना को सक्षम बनाता है. इससे इस चक्रीय और टिकाऊ एक्वाकल्चर का अर्थव्यवस्था में योगदान मिलता है.
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत, 9,467 रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और 4,573 बायोफ्लॉक इकाइयों को मंजूरी दी गई है. जो वर्ष भर मछली पालन को सुविधाजनक बनाती हैं.
इससे गहन तथा व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य मछली उत्पादन मॉडलों की ओर एक बदलाव की शुरुआत का संकेत उपजा हैं.
जो एक्वाकल्चर को पारंपरिक खेती को भौगोलिक क्षेत्रों से परे विस्तारित कर रहे हैं.
इस प्रौद्योगिकी के समावेश को PMMSY के तहत ₹4,120 करोड़ के निवेश द्वारा समर्थन प्राप्त हुआ है.
जो मत्स्य पालन उत्पादन प्रणालियों के आधुनिकीकरण और उन्नत एक्वाकल्चर प्रथाओं के अपनाने में तेजी लाने पर सरकार के जोर को दर्शाता है.
घरेलू उत्पादन को मजबूत करने से परे, RAS और बायोफ्लॉक तकनीकें उच्च-मूल्य समुद्री खाद्य निर्यात में भारत की महत्वाकांक्षाओं का भी समर्थन कर रही हैं.
नियंत्रित खेती वातावरण में उत्पादन को सक्षम बनाकर, ये प्रणालियां गुणवत्ता, पहचानजन्य और जैवसुरक्षा में स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करती हैं.
ये विशेषताएं वैश्विक समुद्री खाद्य बाजारों में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाती हैं. जैसे-जैसे यह क्षेत्र मूल्य संवर्धन और निर्यात-उन्मुख उत्पादन की ओर बढ़ रहा है.
वैसे वैसे प्रौद्योगिकी-संचालित एक्वाकल्चर प्रणालियों से भारतीय समुद्री खाद्य की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में देश की स्थिति को सुदृढ़ करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद जागी है.











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