नई दिल्ली. मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि सरकार पशुधन और मत्स्य पालन क्षेत्रों को मजबूत करने और किसानों, मछुआरों और अन्य हितधारकों के लिए सेवाओं तक पहुंच में सुधार करने के लिए प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठा रही है. आज की तारीख में भारत पशुधन पोर्टल पर 12 अंकों की विशिष्ट पहचान प्रणाली, ‘पशु आधार’ के तहत पंजीकृत पशुधन की संख्या 39.23 करोड़ है. राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) पर 35.85 लाख मछुआरे, मछली पालक, मछली विक्रेता और अन्य हितधारक पंजीकृत हो चुके हैं. पंजीकृत हितधारकों के लिए एनएफडीपी द्वारा लोन और बीमा तक पहुंच को सुगम बनाने के तरीके का विवरण दिया गया है.
इन डिजिटल प्रणालियों, जैसे पशुपालन के लिए ‘भारत पशुधन’ और मत्स्य पालन के लिए ‘एनएफडीपी’ के तहत केसीसी आवेदनों की प्रक्रिया के लिए कोई प्रावधान नहीं है. केसीसी आवेदनों की प्रक्रिया और अनुमोदन बैंकों द्वारा उनके कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर सिस्टम के माध्यम से किया जाता है. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2026-27 तक चार वर्षों की अवधि के लिए चल रही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसवाई) नामक एक नई केंद्रीय क्षेत्र उप-योजना को लागू किया जा रहा है, जिसका अनुमानित व्यय ₹6,000 करोड़ है.
डिजिटल पहचान और डेटाबेस बन जाता है
प्रधानमंत्री-एमकेएसएसवाई के अंतर्गत राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) का शुभारंभ 11.09.2024 को किया गया था.
एनएफडीपी का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र के सभी हितधारकों के लिए कार्य-आधारित डिजिटल पहचान और डेटाबेस बनाकर भारतीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र का औपचारिककरण करना है.
यह संस्थागत लोन तक पहुंच, मत्स्य सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने, जलीय कृषि बीमा को प्रोत्साहन देने, प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन, मत्स्य पालन की पता लगाने योग्य प्रणालियों और प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के लिए एक ही स्थान पर सभी समाधान उपलब्ध कराता है.
आज की तारीख में, 35.85 लाख मछुआरे, मछली पालक, मछली विक्रेता और अन्य हितधारक एनएफडीपी पर पंजीकृत हैं.
पीएमएमकेएसएसवाई के तहत उपलब्ध लाभों, जिनमें वित्तीय और तकनीकी सहायता शामिल है, तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, लक्षित लाभार्थियों द्वारा आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई है.
पीएम-एमकेएसएसवाई के घटक 1-ए के तहत मछुआरों, मछली पालकों, मछली कामगारों, मछली विक्रेताओं, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों आदि को संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ाने का प्रावधान है। एनएफडीपी के अंतर्गत 12 राष्ट्रीयकृत बैंकों को शामिल किया गया है.
एनएफडीपी के तहत प्राप्त प्रारंभिक आवेदन बैंकों को भेजे जाते हैं। बैंक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की आवश्यक कार्रवाई करते हैं. सफल ऋण के लिए पात्र लाभार्थियों को ₹5,000 तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.
इसके अलावा, पीएम-एमकेएसएसवाई योजना के घटक 1-बी के तहत किसानों को मत्स्यपालन बीमा खरीदने के लिए एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है.
मछली पालन बीमा के लिए एकमुश्त प्रोत्साहन राशि भुगतान किए गए प्रीमियम का 40% है, जिसकी अधिकतम सीमा 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर या 4 हेक्टेयर जल क्षेत्र (डब्ल्यूएस) के लिए प्रति किसान ₹1 लाख है.
फार्म, केज कल्चर, आरएएस, बायो-फ्लॉक और रेसवे आदि जैसी गहन मत्स्यपालन प्रणालियों के लिए, मत्स्यपालन बीमा राशि भुगतान किए गए प्रीमियम का 40% है.
जिसकी अधिकतम सीमा 1800 वर्ग मीटर के लिए प्रति किसान ₹1 लाख है. साथ ही, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को 10% का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता है.










