Home मछली पालन Fish: तालाब का पानी हरा है तो न डालें चूना, फिर भी कम न हो तो कॉपर सल्फेट व एट्राजीन का करें इस्तेमाल
मछली पालन

Fish: तालाब का पानी हरा है तो न डालें चूना, फिर भी कम न हो तो कॉपर सल्फेट व एट्राजीन का करें इस्तेमाल

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मछली पालकों (Fish Farming) को सितंबर के महीने में मछली पालन के दौरान कुछ सावधानी बरतनी चाहिए. जैसे मछली बीज उत्पादकों को सितम्बर के पहले हफ्ते के बाद स्पॉन उत्पादन का काम बंद कर देना चाहिए. पंगेशियस मछली के पालन करने वाले किसानों को पूरक आहार प्रबंधन के क्रम में मछली के कुल औसत वजन के हिसाब से छह माह की पालन अवधि में पहले महीने से छठे महीने तक पूरक आहार देना चाहिए. पालन अवधि में मछली के औसत वजन के हिसाब से पहले दो महीने 32 फीसद प्रोटीन युक्त आहार अगले दो माह 28 परसेंट प्रोटीन युक्त आहार, पांचवे माह में 25 फीसद प्रोटीन युक्त आहार और छठे महीने में 20 फीसद प्रोटीन वाला आहार प्राथमिकता के आधार पर दें.

वातावरण का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से कम और 36 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने पर पूरक आहार का प्रयोग आधा कर देना चाहिए. तालाब का पानी अत्याधिक हरा हो जाने पर रासायनिक उर्वरक एवं चूना का प्रयोग एक माह तक बन्द कर देना चाहिए. इसके बाद भी यदि हरापन नियंत्रित नहीं हो तो दोपहर के समय 800 ग्राम कॉपर सल्फेट या 250 ग्राम एट्राजीन 50 फीसद प्रति एकड़ की दर से 100 लीटर पानी में घोल कर तालाब में छिड़काव करना चाहिए.

इन बातों का भी रखें ख्याल
▶️ तालाब में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा कम होने पर ऑक्सीजन बढ़ाने वाली टैबलेट 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें.

▶️ या 15 दिनों के अंतराल पर बारिश के मौसम में ऑक्सीजन पाउडर का सूखा छिड़काव करें या सुबह एवं शाम को चार-चार घंटे एरेटर/एअर ब्लोअर चलाएं.

▶️ नर्सरी तालाब में अत्याधिक रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करें. नर्सरी तालाब में पानी हल्का हरा होने पर 20 किलो ग्राम फिटकरी प्रति एकड़ की दर से 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें.

▶️ मछली की जल्द बढ़वार के लिए फीड सप्लीमेंट के रूप में प्रति किलोग्राम पूरक आहार में 10 ग्राम सूक्ष्म खनिज तत्व (Mineral Mixture) 2-5 ग्रोस गट प्रोबायोटिक्स को वनस्पति तेल या बाजार में उपलब्ध कोई भी बाईडर 30 एमएल प्रति किलो ग्राम फीड में मिलाकर प्रतिदिन खिलाना चाहिए.

▶️ मछली को संक्रमण से बचाने के लिए प्रति 15 दिन पर पी०एच० मान के अनुसार 10-15 किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से चूना घोलकर छिड़काव करें.

▶️ इसके अलावा महीने में एक बार प्रति एकड़ की दर से 400 ग्राम पोटाशियम परमेग्नेट को पानी में घोलकर छिड़काव करें.

▶️ मछली को पारासाईटिक संक्रमण से बचाने के लिए प्रतिमाह 40 किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से नमक को पानी में घोलकर छिड़काव करें.

▶️ महीने में एक सप्ताह प्रति किलो ग्राम पूरक आहार में 10 ग्राम नमक मिलाकर मछलियों को खिलायें.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

Under Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) and Fisheries and Aquaculture Infrastructure Development Fund (FIDF) the Department of Fisheries has approved the development of post-harvest interface viz- cold storage, fish processing and Marketing infrastructure.
मछली पालन

Fish Farming: बिहार में मछलियों की ब्रांडिंग करने की है तैयारी, मछली किसानों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली. बिहार मछली उत्पादन के मामले में आगे बढ़ रहा है....

मछली पालनसरकारी स्की‍म

Fish Farming Scheme: बिना टेंशन करिए मछली पालन, नुकसान होगा तो सरकार करेगी मदद

नई दिल्ली. बाढ़, चक्रवात, जल प्रदूषण और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण...