नई दिल्ली. उत्तराखंड सरकार ने पहली बार नेपाल को पांच मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली भेजी है. यह हिमालयी राज्य का पहला इंटरनेशनल वेंचर है. मत्स्य विकास विभाग अब यूरोप, मिडिल ईस्ट और साउथ-ईस्ट एशिया के दूसरे बाजारों में भी एक्सपोर्ट की संभावनाओं पर काम कर रहा है. कहा जा रहा है कि ऐसा होने से मछली उत्पादकों को सीधे तौर पर बड़ा फायदा होगा. उनकी इनकम में अच्छा खासा इजाफा होगा. इसके अलावा, कुल एक्सपोर्ट 30 मीट्रिक टन होने की उम्मीद भी जताई जा रही है.
पिथौरागढ़ के धारचूला और मुनस्यारी इलाकों की तीन मछुआरा सहकारी समितियों ने इन मछलियों को तैयार किया था. कोल्ड-चेन बनाए रखते हुए, मछलियों को गुजरात के वेरावल भेजा गया, जहां प्रोसेसिंग के बाद 23 जून को इन्हें नेपाल के इंटरनेशनल मार्केट में एक्सपोर्ट किया गया.
23.50 लाख रुपए की हुई कमाई
मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि इस पहले इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन से 33 मछली पालकों को लगभग 23.50 लाख रुपये की कमाई हुई है.
उत्तराखंड के पहले एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए, मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन के लिए 5.4 लाख रुपये की गैप फंडिंग सहायता दी.
उन्होंने कहा कि यह दुबई में गल्फ फूड एक्सपो के दौरान ग्लोबल खरीदारों और स्टेकहोल्डर्स के साथ बने संपर्कों का सकारात्मक नतीजा है.
बहुगुणा ने कहा कि मछली पालकों को मार्केटिंग में मदद देने के लिए 2024 में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के साथ एक MoU साइन किया गया था.
जिसके तहत अब तक 2.10 करोड़ रुपये कीमत की 45.10 मीट्रिक टन ट्राउट मछली सप्लाई की जा चुकी है.
उन्होंने कहा, “राज्य में मछली पालन का क्षेत्र लगातार तरक्की कर रहा है। जहाँ 2022 तक राज्य में सिर्फ़ 10,011 मछली पालक थे.
वहीं अब यह संख्या बढ़कर 15,657 हो गई है. इनमें 3,584 महिला मछली पालक शामिल हैं.
मछली उत्पादन की विकास दर, जो 2012 से 2017 के बीच सिर्फ़ 2% थी, अब 2022-26 में बढ़कर 11% हो गई है.”
उन्होंने आगे बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में राज्य में 11,805 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ.
जिसकी कीमत 165 करोड़ रुपये है. उन्होंने कहा कि विभाग का सालाना बजट भी बढ़कर 261.41 करोड़ रुपये हो गया है.












