नई दिल्ली। बकरी पालन मोटा मुनाफे का व्यापार भी है, अगर इसे अच्छे तरीके से किया जाए. बकरियों की देखभाल, उनका पोषण व आहार, उनके बाड़े की उचित व्यवस्था से बकरी पालने वाले अच्छी कमाई कर सकते हैं. एक छोटी सी जगह पर कम खर्चे में बकरियों को पालकर बड़ा लाभ कमाया जा सकता है. कई बार बकरियों की देखरेख में कमी के कारण कुछ नुकसान उठाना पड़ सकता है. बकरी पालने वालों के लिए ये लेख बेहद कारगर है.
बकरी जुगाली करने वाली जानवर है. इसके पालन का तरीका भेड़ और गाय से बिल्कुल अलग है. पूरा खाना एक बार में न खाकर वह हर समय थोड़ा-थोड़ा खाना पसंद करती है. इसीलिए अच्छे मुनाफा के लिए इसके आहार का उचित इंतजाम जरूरी है. बकरी को मुख्य रूप से तीन प्रकार का चारा दिया जाता है. हरा चारा, सूखा चारा, और दाना। किस समय पर कौना सा चारा दिया जाए, आइये जानते हैं यहां.
हरा चारा : बकरियों के चारे में हरे चारे का विशेष महत्त्व है. इसमें पोषक तत्त्व जैसे प्रोटीन, खनिज वन और विटामिन भरपूर मात्रा में होता है. ये अनेक प्रकार के होते हैं. हरा चारा आप कई साधनों से पा सकते हैं. जैसे जंगली घास, पेड़-पौधे की पत्तियां और फलियां, सब्जियों के पत्ते और उपफता आदि। इनके अलावा आप हरा चारा अपने खेत में भी उगा सकते हैं। जैसे बरसीम, रिजका, लोबिया आदि।
सूखा चारा : बबूल की सूखी पत्तियां, अरहर, चना, मटर का भूसा, मूंग और उड़द की सूखी पत्तियां, बरसीम या रिजका का सूखा चारा बकरियां खूब चाव से खाती हैं. अगर गेहूं का भूसा खिलाना हो तो सानी में मिलाकर खिलाएं, इससे भूसा के स्वाद में बढ़ोत्तरी होती है और बर्बादी कम होती है. सूखा चारा बकरी को हर रोज खिलाएं, इससे बकरियों का पेट ठीक रहता है. सुखा हरा चारा यानी बरसीम, रिजका, सोविया, मकई, नेपियर अगर सूखाकर रखा गया हो तो इससे अच्छा दूसरा कोई चारा नहीं हो सकता है. सूखा चारा बनाने की विधि अगले अध्याय में बतायी गयी है.
दाना: बकरियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए हरा एवं सूखा चारा के साथ-साथ दाना का मिश्रण देना भी जरूरी है. यह मुख्य रूप से मकई जी के साथ खल्ली मिलाकर तैयार किया जाता है. इनमें प्रोटीन, विटामिन और खनिज हायण भरपूर मात्रा में होने के कारण यह संतुलित आहार होता है. बढ़ते हुए मेमने, गाभिन मादा, दूध देने वाली मादा एवं प्रजनन में लाए जाने वाले बोका के लिए यह आवश्यक होता है. बकरियों को दाने का मिश्रण उनकी उम्र तथा उत्पादकता के अनुसार दिया जाता है.
कब कितना खिलाएं बकरियों को उनके वजन का औसत चार प्रतिशत कुल शुष्क खाद्य पदार्थों की आवश्यकता होती है. शुष्क पदार्थ से ताल्लुक यह है कि बकरी को दिये जाने वाला कुल सूखा चारा, दाना की कुल मात्रा तथा हरे चारे में शुष्क पदार्थ की मात्रा को जोड़ कर जो मात्रा आती है उसे कुल शुष्क पदार्थ कहते हैं. आहार की मात्रा बकरी के वजन, उम्र और स्थिति पर निर्भर करती है. इस बात की जानकारी रखना जरूरी है कि बकरियों को किस उम्र में कितना और कौन सा चारा देना चाहिए. अनुकूल वृद्धि के लिए अलग-अलग मात्रा में खाना देना आवश्यक है. आहार में हरा चारा, सूखा चारा एवं दाना लगभग 15.65 एवं 20 प्रतिशत होना चाहिए. प्रत्येक उम्र की बकरी की अलग-अलग समय पर दिये जाने वाले हरा चारा, सूखा चारा एवं दाना की आवयकताएं होती है.
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