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Dairy: दुधारू पशुओं को खरीदना चाहते हैं तो पहले पढ़ लें, ये अहम बातें

हरित प्रदेश मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन सदस्यों को बोनस का तोहफा दिया जा रहा है.
प्रतीकात्मक फोटो. livestock animal news

नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड एनडीडीबी के मुताबिक दुधारू पशु की खरीदते समय लगातार तीन बार दूध दूध कर देख लें. क्योंकि व्यापारी चतुराई से काम लेते हैं और आपको पशु खरीदते समय मात्र एक बार सुबह अथवा शाम को ही दोहन करके दिखाते हैं. ऐसा करने से आप को लगता है कि यह पशु अधिक दूध देने वाला है, लेकिन सच्याई यह नहीं होती है. व्यापारी एक समय का दोहन नहीं करता अथवा कम दूध दोहन करता है जिससे दूध की मात्रा अयन में रह जाती है. इस कारण लगता है कि गाय भैंस अधिक दूध देने वाली है. इसलिए दुधारू पशु को खरीददारी करते समय तीन बार लगातार दुग्ध दौहन अपने सामने अवस्थ करा लेना चाहिए.

दुधारू पशु का चयन करते समय उसकी सही उम्र का पता लगाना आवश्यक होता है. पशु की मही आयु का पता लगाने के ली उसके दांतों को देखा जाता है.

दांतों से क्या पता चलता है
मुंह की निचली पंक्ति में स्थाई दांतों के चार जोड़े होते हैं. ये सभी जोड़े एकसाथ नहीं निकलते हैं. दांत का पहला जोड़ा पौने दो साल की उम्र में. दूसरा जोड़ा ढाई साल की उम्र में, तीसरा जोडा तीन साल के अंत में और चौथा जोड़ा चौथे साल के अंत की उस में निकलता है.

इस प्रकार से दांतों को देखकर नई और पुरानी गाय भैंस की सटीक पहचान की जा सकती है. औसतन एक गाय भैंस 20-22 वर्षों तक जीवित रहती है.

गाय और भैंस की उत्पादकता उसकी उम्र के साथ-साथ घटती चली जाती है. दुधारू पशु अपने जीवन के यौवन और मध्यकाल में अच्छा दुग्ध उत्पादन करता है. इसलिए दुधारू पशु का चयन करते समय उसकी उम्र की सही जानकारी होना बेहद आवश्यक है.

भैंस के सींग के छल्ले भी उम्र का अनुमान लगाने में मददगार होते हैं. पहला छल्ला सींग की जड़ पर आमतौर तीन वर्ष की उम्र में बनता है. इसके बाद प्रतिवर्ष एक-एक छल्ला और आता रहता है.

सींग पर छल्नी की संख्या में दो जोड़कर भैंस की आयु का अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन देखने में आया है कि कुछ लालची लोग अधिक रुपया कमाने के चक्कर में दुधारू पशु खरीदकर को धोखा देने के लिए रेती से छल्लों को रगड़ देते हैं. इसलिए यह विधि विश्वसनीय नहीं कही जा सकती है.

दूध देने वाले दुधारू गाय गैस में सींग पशु की नस्ल की पहचान का मुख्य पहचान होते हैं. अगर सींग के होने या नहीं होने का पशु के दुग्ध उत्पादन की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है.

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